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अहलेबैत से वाबस्ता होने के बाद गुलाम भी बादशाह हो जाता है :  मौलाना मशहदी

लखनऊ। अहलेबैत के दर से जो वाबस्ता हो गया वो अपने वक़्त का मुअल्लिमा और मुअल्लिम बन गया लफ्ज़ कनीज़ और गुलाम को बड़ा बनाया अहले बैत के दर ने उस से पहले कनीज़ का मतलब किसी बड़े घर की बांदी या नौकरानी से ऊपर नहीं होता था यह बात आज यहाँ महबूबा पैलेस करेली मरहूमा अख्तर ज़हरा की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुहम्मद युसूफ मशहदी बनारसी ने कही।

मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना ने माँ की परवरिश पर हुर और हुर की माँ के फज़ाइल एवं ईमाम हुसैन द्वारा एहतराम को बयान किया ईमाम हुसैन ने हुर से कहा कि तुम्हारी माँ ने तुम्हारा नाम हुर रखा हुर का मतलब आज़ादी से है और तुम वाक़ई आज़ाद हो मौलाना ने जनाबे फिज़्ज़ा की फज़ीलत मरतबे को ब्यान करते हुए कहा जब फिज़्ज़ा अहले बैत से वाबस्ता हुई तो कनीज़ फ़ातिमा कहलाईं और ऐसी कनीज़ जिससे बड़े बड़े मुअल्लिम पीछे रह गए कनीज़ या गुलाम बादशाह या ज़मीदार का गुलाम कहलाया जाता था मगर जैसे ही यह लफ्ज़ अहलेबैत एवं मौला अली से जुड़ा तो बड़े बड़े मरजाये किराम ने अपने को गुलामे अली के गुलाम के गुलाम खुद को कहलवाने में फ़ख़्र महसूस किया।

मौलाना युसूफ मशहदी ने कहा औरत को मर्तबा इस्लाम ने अता किया इससे पहले औरत को लोग हक़ीर निगाह यानी गिरा हुआ समझते थे बनारस स्थित मुहल्ला करेली के महबूब पैलेस में ला बुक पब्लिशर के स्वामी मशकूर हसन ज़ैदी की पत्नी अख्तर जहाँ की चालीसवें की मजलिस को ख़िताब किया।
तिलावात समद अब्बास एवं सोज़खानी रियाज़ मिर्ज़ा शुजा मिर्ज़ा तथा पेश खानी के फरायज़ बाबर नदीम ने अंजाम दिए मजलिस में मौलाना मुनव्वर हुसैन रिज़वी,मौलाना फ़िरोज़ साहब बनारसी, मौलाना सय्यद जवाद हैदर जूदी, मौलाना अम्मार ज़ैदी एवं सय्यद निहाल ज़ैदी,ज़ीशान रिज़वी,महमूद ज़ैदी,मुहम्मद हसन ज़ैदी, इसार ज़ैदी, नक़ी ज़ैदी,अबूल हसन ज़ैदी एवं शहर के उलमा के अलावा बड़ी संख्या में बुद्धजीवी पत्रकारों एवं मुअज़्ज़ज़ लोगों ने शिरकत की।

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