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भारत की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए PHFI-IPHS तैयार कर रहा है नई पीढ़ी के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ

नई दिल्ली : भारत आज स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक निवेश कर रहा है। आयुष्मान भारत, डिजिटल हेल्थ मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्वास्थ्य सेवाएं, बीमारियों की निगरानी, महामारी से निपटने की तैयारी, जलवायु से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दे और बचाव पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई पहलें देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है—प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी।

PHFI इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ साइंसेज़ (PHFI-IPHS) के अनुसार, भारत को अपनी बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए 45,000 से अधिक अतिरिक्त जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य ढांचे पर निवेश तेजी से बढ़ा है, लेकिन जनस्वास्थ्य प्रणाली की योजना बनाने, उसका संचालन करने और उसे मजबूत बनाने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या उसी गति से नहीं बढ़ी है।

इसी जरूरत को देखते हुए, पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (IIPH) के नाम से जाना जाने वाला PHFI-IPHS, बहुविषयक शिक्षा, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार कर रहा है।

हाल ही में शिक्षा मंत्रालय के तहत यूजीसी विनियमों की ‘डिस्टिंक्ट कैटेगरी’ में डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त करने वाला PHFI-IPHS, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) की पिछले दो दशकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा, शोध और नीति निर्माण के क्षेत्र में रही मजबूत विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

PHFI-IPHS के एक प्रतिनिधि ने कहा, “भारत की स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं केवल अस्पतालों और बुनियादी ढांचे का विस्तार करने से पूरी नहीं होंगी। इसके लिए ऐसे प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरत है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करें, शोध और तथ्यों के आधार पर बेहतर नीतियां बनाने में मदद करें और लोगों तक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाएं। PHFI-IPHS ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारत और दुनिया के सामने आने वाली नई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सकें।”

आज स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों और इलाज तक सीमित नहीं रह गई हैं। कोविड-19 महामारी ने यह साबित कर दिया कि ऐसे विशेषज्ञ कितने जरूरी हैं, जो बीमारी फैलने पर नजर रख सकें, स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन और विश्लेषण कर सकें, बेहतर स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार कर सकें, नीतियां बनाने में सहयोग दे सकें और किसी भी स्वास्थ्य संकट से पहले स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना सकें।

दुनिया भर में सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और स्वास्थ्य संगठन अब महामारी विज्ञान (एपिडेमियोलॉजी), स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, कार्यान्वयन विज्ञान, जनस्वास्थ्य प्रबंधन, डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीति अनुसंधान जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों में लगातार निवेश कर रहे हैं, ताकि बड़े स्तर पर लोगों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सके।

भारत भी ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगी। स्वास्थ्य पर बढ़ता खर्च, बदलते रोगों का स्वरूप, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम, बुजुर्ग आबादी में बढ़ोतरी, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) और स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल तकनीकों का बढ़ता उपयोग नई चुनौतियां पैदा कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ऐसे प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है, जिन्हें बीमारियों की निगरानी, जनस्वास्थ्य, स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, स्वास्थ्य प्रबंधन, डिजिटल स्वास्थ्य, सार्वजनिक नीति, समुदाय के साथ काम करने, कार्यान्वयन अनुसंधान और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की अच्छी जानकारी हो।

PHFI-IPHS का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों के बिना सबसे आधुनिक अस्पताल और स्वास्थ्य ढांचा भी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाएगा।

इसी कमी को दूर करने के लिए PHFI-IPHS आधुनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुसार बहुविषयक शैक्षणिक कार्यक्रम चला रहा है। इनमें मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH), मास्टर ऑफ हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन (MHA), एमएससी इन वन हेल्थ तथा एमएससी इन डिजिटल हेल्थ एंड डेटा साइंस शामिल हैं।

इन कार्यक्रमों में महामारी विज्ञान, स्वास्थ्य नीति, डेटा साइंस, व्यवहार विज्ञान, प्रबंधन और कार्यान्वयन अनुसंधान जैसे विषय शामिल किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो सकें।

पढ़ाई के साथ-साथ विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य अनुभव भी देता है। उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, सरकारी स्वास्थ्य प्रणालियों, सामुदायिक स्वास्थ्य पहलों, सार्वजनिक नीति, शोध परियोजनाओं, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों और वैश्विक सहयोग कार्यक्रमों से जुड़ने का अवसर मिलता है। इससे वे समझ पाते हैं कि स्वास्थ्य नीतियां जमीन पर किस तरह लागू होती हैं।

PHFI-IPHS, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) की उस मजबूत परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है, जिसने गैर-संचारी रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों, पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने, जलवायु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य, डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य वित्तपोषण जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

हैदराबाद, बेंगलुरु और भुवनेश्वर स्थित अपने परिसरों के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ तैयार करना है, जो वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सकें और भारत की जनस्वास्थ्य क्षमता को मजबूत बना सकें।

PHFI-IPHS का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी देश बनना है, तो केवल अस्पतालों का विस्तार, बेहतर बुनियादी ढांचा और नई तकनीकों को अपनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ-साथ एक मजबूत और प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य कार्यबल तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। संस्थान का विश्वास है कि आज तैयार किए गए कुशल जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ आने वाले वर्षों में देशभर के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश को बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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