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एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री के दूसरे वार्षिक सम्मेलन का आयोजन

AIFI वार्षिक सम्मेलन में भारत के लिए 'चाइना प्लस वन' अवसर और अधिक स्मार्ट तथा मजबूत फोर्जिंग उद्योग की आवश्यकता पर दिया गया जोर

लखनऊ : भारतीय फोर्जिंग क्षेत्र की शीर्ष संस्था, एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री ने “न्यू डेवलपमेंट ट्रेंड्स – इम्पैक्ट ऑन फोर्जिंग इंडस्ट्री” विषय पर अपने दूसरे वार्षिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में उद्योग के प्रमुख हितधारकों ने बदलते कारोबारी माहौल और भारतीय फोर्जिंग उद्योग के भविष्य को आकार देने वाले अवसरों तथा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, उभरते ‘चाइना प्लस वन’ अवसर, प्रौद्योगिकी और ऑटोमेशन, उत्पादकता, जनशक्ति, बढ़ती इनपुट लागत तथा पूरे क्षेत्र में अधिक मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सम्मेलन का सामूहिक संदेश स्पष्ट था कि भारत के पास पसंदीदा वैश्विक साझेदार बनने के लिए विनिर्माण आधार, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बाजार के अवसर मौजूद हैं, लेकिन कंपनियों को विकास के अगले चरण का लाभ उठाने के लिए अधिक जिम्मेदारी लेने, अनिश्चितता से निपटने, ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करने और उच्च-मूल्य समाधान देने की क्षमता विकसित करनी होगी।

सभा को संबोधित करते हुए AIFI के अध्यक्ष और वर्षा फोर्जिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, यश मुनोट ने कहा, “भारतीय फोर्जिंग उद्योग एक अहम मोड़ पर है, जहां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन से भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा हो रहे हैं। इसके साथ ही, हमें भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़ती इनपुट लागत, तकनीकी बदलावों और ग्राहकों की बदलती आवश्यकताओं से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, बीएमडब्ल्यू ग्रुप प्लांट चेन्नई के प्रबंध निदेशक, थॉमस डोज़ ने ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के संदर्भ में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता पर बात की। उन्होंने रेखांकित किया कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल और एकल आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों के कारण वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रही हैं। अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े घरेलू बाजार और सक्षम फोर्जिंग इकोसिस्टम के साथ, भारत के पास पसंदीदा ‘प्लस वन’ गंतव्य के रूप में उभरने का मजबूत अवसर है। श्री डोज़ ने जोर देकर कहा कि यह अवसर केवल विनिर्माण और सोर्सिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ग्राहक अब ऐसे आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं जो इंजीनियरिंग और विकास क्षमताओं में अधिक योगदान दे सकें और शुरू से अंत तक पूरी जिम्मेदारी ले सकें।
सम्मेलन में एआईएफआई पश्चिमी क्षेत्र के चेयरमैन और एस. बी. फोर्जटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ,  सुनील जावलेकर ने स्वागत भाषण दिया। पीडब्ल्यूसी के कार्यकारी निदेशक,  योगेश ठाकर ने “इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री – नेक्स्ट ग्लोबल एज” विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय फोर्जिंग कंपनियों के लिए वैश्विक विनिर्माण इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में ऐआईएफआई प्रबंध समिति के सदस्य, उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि और प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। स्मृति चिन्ह भेंट करने और धन्यवाद ज्ञापन का कार्य ऐआई एफआई के उपाध्यक्ष और सुपर ऑटो फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक,  एस. रविशंकर द्वारा किया गया।
सम्मेलन में “मैनेजिंग अनसर्टेनिटी / चैलेंजेस टू कैपिटलाइज ऑन डिमांड सर्ज” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया। इसका संचालन एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष और सुपर ऑटो फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  एस. रविशंकर ने किया। पैनलिस्ट के रूप में एम.एम. फोर्जिंग्स लिमिटेड के सीएमडी   विद्याशंकर कृष्णन, बजाज मोटर्स लिमिटेड के एमडी  विकास बजाज और हिर्शवोगेल कंपोनेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ श्री साहिल जैन शामिल थे। चर्चा में मांग में अपेक्षित वृद्धि और उसका लाभ उठाने के लिए उद्योग की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें जीएसटी, जनशक्ति की उपलब्धता, ऑटोमेशन, तकनीकी अपग्रेड, निवेश, प्रशिक्षण, आकस्मिक योजना (कंटींजेंसी प्लानिंग), आरएंडडी, उत्पादकता, मांग प्रबंधन और बढ़ती इनपुट लागत जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

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