आनंदोत्सव ’26 में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल का युवाओं से नशे के खिलाफ और यमुना संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान

नई दिल्ली : आर्य समाज वसंत विहार में गुरुवार को 40वें वार्षिक आनंदोत्सव के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने नशामुक्त समाज और यमुना संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जस्टिस प्रीतम पाल, आर्य समाज वसंत विहार के अध्यक्ष संतोष कपूर तथा आर्य युवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मिलाप पब्लिकेशंस के प्रबंध संपादक योगी सूरी भी शामिल हुए।
तीन दिवसीय आनंदोत्सव का पहला दिन 14 अक्टूबर को ‘नो नशा नेशन’ अभियान को समर्पित रहा। योगी सूरी के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना है। दूसरे दिन ‘YaRI’ (यमुना एक्शन रिवर इनिशिएटिव) के माध्यम से यमुना में बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने और नदी के संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती के जीवन और उनके विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस गोयल ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण कई बार युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं और फिर उससे बाहर निकलना उनके लिए कठिन हो जाता है। युवाओं में अपार ऊर्जा और समाज को सकारात्मक दिशा देने की क्षमता है। इस शक्ति का उपयोग रचनात्मक कार्यों में होना चाहिए, न कि नशे की लत में इसे गंवाया जाना चाहिए।
जस्टिस प्रीतम पाल ने मानवीय मूल्यों की अहमियत बताते हुए जस्टिस गोयल की उस सीख को याद किया, जिसमें वे कहते थे, “आप जीवन में कुछ बनें या न बनें, लेकिन एक अच्छे इंसान जरूर बनें।” पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जज के रूप में साथ काम करने के अनुभव का उल्लेख करते हुए जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि जस्टिस गोयल हमेशा पद और पेशेवर उपलब्धियों से ऊपर मानवीय गुणों को महत्व देते रहे। उन्होंने कहा कि एक अच्छा इंसान न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाता है और इस तरह पूरे समाज को मजबूत करता है।
मॉडर्न स्कूल, वसंत विहार की प्रधानाचार्य विभा खोसला ने यमुना नदी पहल पर प्रस्तुति देते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता रेखांकित की। महात्मा आनंद स्वामी प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी विशेष प्रस्तुति दी। वहीं, ‘YaRI – Our Responsibility’ शीर्षक से प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने यमुना प्रदूषण की समस्या और इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत डीएवी गान और महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती के जीवन, वेदों के प्रति उनके प्रेम तथा प्रकृति के प्रति उनके सम्मान पर आधारित प्रस्तुति से हुई। विद्यालय के संगीत दल ने ‘कीप स्माइलिंग’ गीत के माध्यम से उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, गुब्बारे छोड़ने और लोकनृत्य की प्रस्तुति ने समारोह को विशेष रूप दिया। दिनभर आयोजित अंतरविद्यालय प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आनंदोत्सव ’26 का समापन 16 अक्टूबर को होगा। समापन समारोह में पद्मश्री डॉ. पुनम सूरी मुख्य रूप से शामिल होंगे। वे डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष और आर्य प्रतिनिधि सभा के 21वें अध्यक्ष हैं। अंतिम दिन विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सम्मान समारोह और पुरस्कार वितरण के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का समापन होगा।


