तीन माह के भीतर कराये जायें उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव।
उच्चतम न्यायालय के आदेश का हो तत्काल पालन: भाकपा
लखनऊ : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी डा. गिरीश ने माननीय उच्चतम न्यायालय, प्रयागराज के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमे माननीय न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को उत्तर प्रदेश में तीन माह के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है।
अपने आदेश में न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 243- ई के तहत 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव कराना अनिवार्य है, और न कराना संविधान का उल्लंघन है। यह तानाशाह राज्य सरकार के लिये शर्मिंदगी की बात है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा सचिव ने कहा कि उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद दो तथ्य सामने आगये हैं- प्रथम यह कि राज्य सरकार को अब लोकतांत्रिक मूल्यो की अवहेलना तत्काल बंद कर देनी चाहिये और तीन माह के भीतर चुनाव करा देने चाहिये।दूसरा यह कि चुनावो को आगे खिसका कर राज्य सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया है, और इसकी उसे नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिये।
लेकिन खेद की बात है कि न्यायालय के आदेश का पालन करने के बजाय राज्य सरकार चुनाव टालने को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने जारही है और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से भाग रही है।
उसको भय है कि इन चुनावो में वह बुरी तरह हारेगी और इसका भारी असर आगामी विधान सभा चुनावो पर पड़ेगा। अपने राजनैतिक लाभ के लिये भाजपा/ आरएसएस किस हद तक जा सकते हैं, आज यह सभी जान चुके हैं।
भाकपा मांग करती है कि राज्य सरकार लोकतंत्र के साथ लुकाछिपी का यह नाटक बंद करे, और तत्काल पंचायत चुनाव कराये। और ये चुनाव राजनैतिक दलों के चुनाव निशान पर कराये जायें, ताकि चुनाव बाद शासक दल द्वारा की जाने वाली घपलेबाजी रोकी जा सके।



