रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेश: मर्यादा, आत्म-स्मृति और श्रेष्ठ जीवन का संकल्प

लखनऊ। ब्रह्माकुमारीज गोमती नगर केंद्र में रक्षाबंधन का पर्व आध्यात्मिक भाव एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित आगंतुकों को संबोधित करते हुए राजयोगिनी राधा दीदी ने रक्षाबंधन को केवल रक्षा का नहीं, बल्कि जीवन में श्रेष्ठ मर्यादाओं को अपनाने और परमात्म-स्मृति से स्वयं को सुरक्षित रखने का पर्व बताया।
उन्होंने कहा कि हर कर्म के पीछे एक नियम और मर्यादा होती है। जिस प्रकार राखी का धागा रक्षा और बंधन का प्रतीक है, उसी प्रकार नियम एवं मर्यादाओं से युक्त जीवन व्यक्ति को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाता है। शरीर से परे हमारी वास्तविक पहचान आत्मा है और आत्म-स्मृति में रहना ही श्रेष्ठ जीवन की पहली मर्यादा है। जब व्यक्ति परमात्म-स्मृति में रहता है, तो परमात्मा की शक्ति उसे सुरक्षा की छाया प्रदान करती है और दूसरों के प्रति मधुरता एवं प्रेम सहज हो जाता है।
राधा दीदी ने कहा कि मर्यादित जीवन के द्वारा हम श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं तथा समाज में श्रेष्ठ संस्कारों और मूल्यों का निर्माण कर अपना मूल्यवान योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर स्वर्णलता दीदी ने कहा कि आज त्योहार कई बार रिश्तों की उलझनों में सिमटकर रह जाते हैं, जबकि उत्साह ही उत्सव का मूल है। जब हम उत्साह में रहते हैं तो हर दिन उत्सव बन जाता है। मन को मानसिक उलझनों से मुक्त कर पाना ही सच्ची स्वतंत्रता है। राजयोग के माध्यम से हम अपने मन को श्रेष्ठ संकल्पों से सजाकर सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में स्वर्णलता दीदी ने सभी को राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से दिव्य अनुभूति कराई। तत्पश्चात ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन का पावन संदेश दिया तथा प्रसाद वितरण किया गया।



