कांग्रेस ने कुपोषण व बीमारियों से 22 आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर भाजपा सरकारों को घेरा, जांच समिति और जवाबदेही की मांग
तीन छात्राओं की मौत का मामला भी उठाया डॉ. भूरिया ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सभी आदिवासी छात्रावासों के सेफ्टी ऑडिट की मांग उठाई

नई दिल्ली : कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण, मलेरिया व खसरे से 22 आदिवासी बच्चों तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बदहाल आदिवासी छात्रावास में सांप काटने से तीन छात्राओं की मौत को लेकर भाजपा सरकारों पर आदिवासियों के प्रति घोर उपेक्षा एवं संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने इन दोनों घटनाओं की तत्काल निष्पक्ष जांच के लिए विशेष समिति गठित करने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सभी आदिवासी छात्रावासों का सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आदिवासी बच्चों के लिए पोषण व्यवस्था में प्रोटीनयुक्त आहार शामिल करने की भी मांग की।
डॉ. भूरिया ने मध्य प्रदेश के बालाघाट का मामला उठाते हुए बताया कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह में शामिल बैगा समुदाय के 22 बच्चों की मौत कुपोषण, मलेरिया और खसरे से हुई है। सरकारी आंकड़ों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल आठ मौतों की पुष्टि कर सच्चाई को छुपाने का प्रयास कर रहा है।
बालाघाट को लेकर बेहद संगीन खुलासा करते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पिछले छह महीनों से घर-घर पहुंचने वाला पोषण आहार बंद है और जो राशन दिया जा रहा था, वह बेहद खराब गुणवत्ता का था। उन्होंने कहा कि निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 20 किलोमीटर दूर है और टीकाकरण कवरेज 80 प्रतिशत से कम है, जिसके कारण बीमारियां तेजी से फैलीं। पीड़ित परिवारों को दी गई मात्र 20,000 रुपये की सहायता राशि पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरे सरकारी तंत्र की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये आते हैं, लेकिन यह पता नहीं चलता कि वह पैसा जाता कहां है?
डॉ. भूरिया ने कहा कि आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले पट्टे पूरी तरह खारिज हो चुके हैं। आदिवासियों के पास न रोजगार है, न स्वास्थ्य सेवाएं हैं और न कोई ऐसा तंत्र है जिससे वह अपनी आवाज पूरी ताकत से उठा सकें।
कांग्रेस नेता ने मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए जवाबों का हवाला देते हुए बजट आवंटन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि वहां की सरकार अति-कुपोषित बच्चे के पोषण आहार पर प्रतिदिन मात्र 12 रुपये खर्च कर रही है। वहीं बेहद कमजोर और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए बनाए गए पुनर्वास केद्रों में प्रति बच्चे के पोषण एवं इलाज के लिए केवल 980 रुपये खर्च होते हैं। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के पास आदिवासी ब्लॉकों में कुपोषण निवारण योजना के लिए बजट का प्रावधान नहीं है।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की घटना का उल्लेख करते हुए डॉ. भूरिया ने आदिवासी छात्रावासों के अमानवीय हालात को उजागर किया। उन्होंने बताया कि गढ़चिरौली के एक आदिवासी छात्रावास में बिस्तर की व्यवस्था न होने के कारण एक ही कमरे में 70 से अधिक छात्राएं फर्श पर सोने को मजबूर थीं। उन्होंने कहा कि जहरीले सांप के काटने से छह में से तीन छात्राओं की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि गढ़चिरौली के प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं और वे उस क्षेत्र के प्रभारी इसलिए बने क्योंकि वहां खदानें हैं, ताकि बड़े-बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्रों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की जा रही है और छात्रावासों की खिड़कियों में सुरक्षा जालियां तक नहीं हैं।
डॉ. भूरिया ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के छात्रावासों में बीते दो वर्षों में 550 से 600 बच्चों की मौत हुई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रावासों की बदहाल स्थिति को लेकर नासिक में छात्रों की भूख हड़ताल भी जारी है।



