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‘तुमको क्या इल्म है कैसे ये हुनर आता है,दर्द के बाद ये गज़लों में असर आता है’

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में लालकिले के टाउन हाल में में एक बार फिर सजी कवियों की महफिल

            रिपोर्ट -विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में लालकिले पर ऐतिहासिक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन -2024, 18 जनवरी को लालकिले के टाउन हाल, चांदनी चौक में आयोजित हुआ.

समारोह के मुख्य अतिथि सौरभ भारद्वाज,दिल्ली सरकार के कला , संस्कृति एवम् भाषा मंत्री थे जबकि कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा ने की. कुशल संचालन प्रसिद्ध गीतकार कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने किया.

इसके साथ ही अन्य वरिष्ठ कवियों में पद्मश्री अशोक चक्रधर,अरूण जैमिनी,डा. प्रवीण शुक्ल, प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु’ विष्णु सक्सेना, दीक्षित दनकौरी,अजहर इकबाल, प्रियांशु गजेन्द्र, राजेन्द्र मालवीय, संध्या यादव,अभय प्रताप सिह, श्र्वेता श्रीवास्तव,, अखिलेश मिश्र, रश्मि शाक्य, मनीष कुमार,कर्नल वी पी सिंह, श्वेता श्रीवास्तव, संध्या यादव, सर्वेश अस्थाना,सूरज राज सूरज,मुमताज़ नसीम, राजेंद्र मालवीय,विनीत पाण्डेय, मदन मोहन समर,अमित पुरी,अक्षय प्रताप अक्षय आदि राष्ट्रीय रचनाकारों ने कविता पाठ कर सुधि श्रोताओं को रसविभोर किया.

कवि सम्मेलन का शुभारम्भ कवयित्री रश्मि शाक्य ने संस्कृत में वाणी वंदना से किया.अमित पुरी ने गजल पेश की ‘तुमको क्या इल्म है कैसे ये हुनर आता है,दर्द के बाद ये गज़लों में असर आता है.

,इसके बाद पद्मश्री अशोक चक्रधर ने रचना पेश की, अगले कवि के रूप में विनीत पाण्डेय ने ‘हम कौन लोग हैं’ शीर्षक से परिचय दिया.

अगली कड़ी में श्वेता श्रीवास्तव ने श्रोताओं को अपने काव्य पाठ से रस सिक्त किया.कर्नल वी पी सिंह ने ‘ये देश किसका है’ शीर्षक से देश की विभूतियों का विश्लेषण किया.

कवि गजेंद्र प्रियांशु ने प्रेम पर रचना पढ़ी.मदन मोहन समर ने वीर रस पर आधारित कविता सुनाई.

अज़हर इक़बाल ने अलग अंदाज में शेरो शायरी का लुत्फ़ श्रोताओं को दिया. कवि राजेंद्र मालवीय आलसी ने कवि सम्मेलन का समय बढ़ाया,

कवि अखिलेश मिश्र ने संविधान पर आधारित रचना सुनाई,इसके बाद कवयित्री प्रेम सिंह ने अपने भावों की अभिव्यक्ति रचना के माध्यम से की,सूरज राय सूरज ने काव्यपाठ किया,कवयित्री संध्या यादव ने कवि सम्मलेन को ऊचाईयां प्रदान की,

अगली कवयित्री रश्मि शाक्य थीं, इसके उपरांत अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु ‘ ने माँ को समर्पित कविता पाठ किया,

इसके साथ ही ‘दिखता है आँखों से जो दोस्त धोखा भी हो सकता है,नियत किसी की जानने को एक ज़माना चाहिए’ पक्तियों से अपनी बात रखी.

 

इसके उपरांत डॉ.प्रवीण शुक्ल ने छंद युक्त कविताओं से हास्य व अन्य रस पर आधारित काव्य पाठ किया,कवि सम्मेलन का संचालन कर रहीं जानी मानी कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने ‘अयोध्या में जो ढूंढोगे तो श्रीराम मिलते हैं’ व ‘जब भी मन की माला फेरी रचनाओं को पेश किया,

इसके बाद का सोपान कवि अरुण ज़ेमिनी थे जिन्होंने कोरोना काल की त्रासदी के बाद के माहौल को उजागर किया, वरिष्ठ गीतकार विष्णु सक्सेना ने चर्चित गीत तुम हमारी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें सुना कर समा बांध दिया.

 

कवि सम्मलेन की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा ने अपने जाने माने अंदाज में श्रोताओं का दिल जीता तथा क्षण भंगुर काया पर अभिमान ना करते हुए एकता के सूत्र में बंधने का सन्देश दिया.

कार्यक्रम के श्रोताओं में कवयित्री पूनम माटिया, संजना , उषा किरण, सामाजसेवी श्रवण अग्रवाल, समाजसेवी संदीप अरोड़ा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम का आनन्द लिया.

इससे पूर्व सभी मंचासीन कवियों को दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने कर कमलों द्वारा अंगवस्त्र पहना कर सम्मानित किया.

इससे पूर्व हिन्दी अकादमी के सचिव संजय कुमार गर्ग ने कवियों को नवांकुर देकर सम्मानित किया.

इस अवसर पर विभाग की दो पत्रिकाओं कॉमिक्स ‘दो बैलों की कथा’ प्रेमचंद कृत व हार की जीत सुदर्शन कृत का विमोचन मंत्री सौरभ भारद्वाज द्वारा किया गया.

 

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