हिन्दी वैश्विक भाषा है, इसे पहचानने की आवश्यकता है: राम चन्द्र जांगड़ा
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति का हिन्दी विश्व की भाषा कैसे बने विषयक गोष्ठी व सम्मान समारोह आयोजित

रिपोर्ट -विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति के द्वारा संगोष्ठी एवं साहित्यकार सम्मान समारोह रोशनारा क्लब नई दिल्ली में 28 दिसंबर को किया गया.संगोष्ठी का विषय हिन्दी विश्व की भाषा कैसे बने था.

इस समारोह के मुख्य अतिथि जगदीश मित्तल राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक थे जबकि अध्यक्षता सांसद राम चन्द्र जांगड़ा ने की.

इस अवसर पर सांसद राम चन्द्र जांगड़ा ने कहा कि हिन्दी का आदर ना होने से हमारे देश में बहुत से नुकसान हुए हैं.

देश का गणित चला गया. हिन्दी वैश्विक भाषा है, इसे पहचानने की आवश्यकता है.

भारतीय संस्कृति की सुंदरता है कि सम्बन्ध जन्म जन्मांतर तक माने जाते हैं. हमारे देश से जब से हिन्दी गयी तब से सम्बन्ध भी चले गए.

यह अंग्रेजी का प्रभाव है. हिन्दी न होने के कारण हमारे देश का कितना नुकसान हुआ है.

अगर हमें सम्बन्धो, गणित को पुनरस्थापित करना है तो हिन्दी को भी पुनरस्थापित करना होगा.

मुख्य अतिथि जगदीश मित्तल ने कहा कि हिन्दी के लिए करना बहुत कुछ है पहल घर से प्रारम्भ करें.

डॉ.बी एल गौड़ ने कहा कि हिन्दी इतनी वैज्ञानिक भाषा है कि इससे अन्य को आधार मिला है.

श्री वेद प्रकाश गौड़ ने कहा कि हिन्दी को अंतराष्ट्रीय भाषा बनाने की आवश्यकता है.

इसके लिए हमें अन्तःकरण से राष्ट्रीय होना होग्स. सुश्री जय वर्मा ने कहा कि हिन्दी की सभी को जरूरत है.

हिन्दी के बिना काम नहीं चल सकता. अगर हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल कराना है तो हिन्दी को सम्मान भारत में मिले.

इस अवसर पर देश -विदेश हिन्दी के लिए काम कर रहे प्रवासी भारतीयों को अंग वस्त्र, पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया.

सम्मानित होने वाली विभूतियों में जगदीश मित्तल, डॉ. प्रेम चन्द्र पतंजलि, डॉ. राम चन्द्र आर, रमेश आर्य, डॉ. राजेश कुमार मांझी,

चवाकुल रामकृष्ण राव, डॉ. हरि सिंह पाल, श्रीमती कादम्बरी आदेश,इंद्र जीत शर्मा, डॉ. अनिता कपूर, स्वाति सिंह, सुरेश चन्द्र शुक्ल लोग शामिल हैं.

कार्यक्रम में समिति के सचिव डॉ. आशीष गुप्ता, उपाध्यक्ष राजेश गर्ग. महासचिव प्रवीन गुप्ता, मुख्य कार्यधिकाडॉ. वेद प्रकाश गौड़, कार्यकारी अध्यक्ष

डॉ. श्री भगवान शर्मा सहित काफ़ी संख्या में साहित्य प्रेम उपस्थित थे.




