खून बेचकर पढ़ाई का खर्च उठाना, भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों का परिणाम है : राजेन्द्र पाल गौतम

लखनऊ । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी उ0प्र0 श्री राजेन्द्र पाल गौतम जी पूर्व मंत्री ‘‘छात्रों के हक की बात युवाओं के साथ’’ कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करने मड़ियाहूं जनपद जौनपुर पहुंचे, जहां उन्होने छात्रों से जुड़े अनेकों मुद्दों सहित इलाहाबाद में छात्रों द्वारा अपना खून बेचकर पढ़ाई करने के मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार पर खूब बरसे।
प्रदेश प्रभारी श्री राजेन्द्र पाल गौतम जी ने कहा कि प्रयागराज से मिली एक मीडिया रिपोर्ट ने पूरे प्रदेश के युवाओं की असली तस्वीर सामने रखी है उन्होंने कहा कि ये भाजपा का कैसा राम राज्य है जहाँ हमारे गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए अपने शरीर को जोखिम में डालने और अपना खून बेचकर पढ़ाई का खर्च उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है, उन्होंने कहा कि प्रयागराज में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा अपना खून बेचकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने का मामला भाजपा सरकार के माथे पर एक कलंक है, प्रयागराज की घटना ने योगी आदित्यनाथ सरकार के शिक्षा और छात्र विरोधी चेहरे को उजागर कर दिया है।
जिस उत्तर प्रदेश का बजट लाखों करोड़ रुपये का है, वहीं छात्र कोचिंग, किराए और भोजन के खर्च से जूझ रहा है। बजट विश्लेषण के अनुसार, 2025-26 में शिक्षा पर प्रस्तावित खर्च कुल व्यय का 13.8 प्रतिशत था, जबकि योगी सरकार की शिक्षा पर पर्याप्त निवेश और जरूरतमंद छात्रों तक सहायता पहुंचाने के लिए उसकी ठोस कार्ययोजना नहीं है।
उ0प्र0 के छात्रों के भविष्य को लेकर कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिसका जवाब हम योगी आदित्यनाथ सरकार से चाहते हैं।
1. आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रतियोगी छात्रों की पहचान के लिए प्रदेशव्यापी सर्वे कब होगा?
2. जरूरतमंद छात्रों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था क्या है?
3. छात्रवृत्ति के लंबित भुगतानों का पूरा हिसाब कब सार्वजनिक होगा?
4. प्रयागराज जैसे शिक्षा केंद्रों में सस्ते छात्रावास और भोजन की व्यवस्था कब होगी?
5. युवाओं की शिक्षा और रोजगार के सवालों पर सरकार समयबद्ध जवाब कब देगी?
₹8.08 लाख करोड़ के बजट वाले उ0प्र0 में छात्रों के लिए राहत नहीं है। विकसित उत्तर प्रदेश की बात करने वाले योगी राज में प्रयागराज में छात्र पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए खून बेचने तक को मजबूर हैं। शिक्षा पर खर्च में यूपी सरकार की कंजूसी दिखती है। 2025-26 के बजट में शिक्षा का हिस्सा 13.8 प्रतिशत था, जबकि राज्यों का तुलनात्मक औसत 15 प्रतिशत था। सरकार रिक्त पदों, लंबित भर्तियों और पूरी हुई नियुक्तियों का हिसाब सार्वजनिक करे। कोचिंग, किराए और भोजन का खर्च न उठा पाने वाले गरीब छात्रों के लिए कोई विशेष राहत योजना नहीं है। कितने विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिली और कितनों का भुगतान लंबित है? सरकार से इस आंकड़े की हम मांग करते हैं। प्रयागराज के प्रतियोगी छात्रों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित कर सस्ते छात्रावास, किफायती मेस और निःशुल्क पुस्तकालय उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
*मुख्यमंत्री योगी बतायें ये कौन सा रामराज्य है जहाँ छात्रों को अपना खून बेचकर पढ़ाई का खर्च उठाना पड़ रहा है। युवाओं को रोजगार चाहिए, भाषण नहीं, युवा केवल चुनावी भाषणों का विषय नहीं हैं। वे इस देश व प्रदेश के वर्तमान और भविष्य हैं। छात्रों को तत्काल राहत, शिक्षा के बजट का जवाबदेह इस्तेमाल, भर्ती और छात्रवृत्ति पर पारदर्शिता तथा युवाओं के सम्मान की गारंटी के साथ उत्तर प्रदेश का गरीब बच्चा सम्मान के साथ पढ़ सके और उसे अपना भविष्य बनाने के लिए उसे अपने स्वास्थ्य से समझौता न करना पडे़, ये हमारी मांग ही नहीं छात्रों का अधिकार भी है। कांग्रेस की मांग है कि प्रदेशव्यापी सर्वे हो, जरूरतमंद छात्रों को तत्काल राहत मिले और सरकार जवाबदेही तय करे। प्रयागराज के मामलों की निष्पक्ष जांच हो और जरूरतमंद विद्यार्थियों को चिकित्सा व आर्थिक सहायता मिले। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी।*



