उत्तर-प्रदेशनई दिल्लीबड़ी खबरलखनऊ

वेदों की जितनी प्रशंसा की जाय कम इसमें निहित हर प्रकार का ज्ञान: डॉ. कर्ण सिंह

" वेद मंजूषा " इंसाइकिलॉपीडिया ऑफ़ वेदास चारों वेदों ( यजुर्वेद, सामवेद, ऋग्वेद,अथर्ववेद )  के हिन्दी,अंग्रेजी मे अनुवाद के साथ 17 खंडो में प्रकाशित पुस्तक सीरीज़ का विमोचन

रिपोर्ट – विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली : जाने माने दार्शनिक, चिंतक, विचारक व राजनीतिज्ञ डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि वेदों की जितनी प्रशंसा की जाय, कम है.

हर प्रकार का ज्ञान, हर क्षेत्र का ज्ञान वेदों में है. चाहे वह सामाजिक क्षेत्र हो, आध्यात्मिक क्षेत्र हो, आर्थिक क्षेत्र हो, वैज्ञानिक क्षेत्र हो. उन्होंने कहा कि मुझे उपनिषद प्रिय है. इसमें ऋषियों के वाक्य हैं. उपनिषद का एक -एक सूत्र ज्ञान का अंग है. विदेश में लोग वेदो के बारे में जानकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं.


डॉ. कर्ण बुधवार, 28 दिसंबर को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल में ” वेद मंजूषा ” इंसाइकिलॉपीडिया ऑफ़ वेदास चारों  वेदों ( यजुर्वेद, सामवेद, ऋग्वेद, अथर्ववेद )  के हिन्दी,अंग्रेजी  और संस्कृत मे अनुवाद के साथ 17 खंडो में पुस्तक सीरीज़ के विमोचन अवसर पर बतौर  मुख्य अतिथि साहित्यप्रेमियों को सम्बोधित कर रहे थे.

उन्होंने कार्यक्रम के संयोजक व नीता प्रकाशन के निदेशक राजेश गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि मैं बहुत कृतज्ञ हूं कि ऐसे कार्यक्रम में सम्मिलित होने का आपने हमें अवसर दिया.

उन्होंने ‘वेद मंजूषा  की संकल्पना करने वाले स्व. राधे श्याम गुप्ता व स्व. वेद प्रकाश जी को नमन करते हुए कहा कि उन्हें हम कभी भुला नहीं सकते जिन्होंने किस लगन, श्रद्धा से यह कार्य किया होगा.

उन्होंने 17 खंडो में सारे वेदों को वर्णित किया1. अल्फाबेटिकल आर्डर में संग्रहित करना बहुत बड़ा कार्य है.

उन्होंने संपादन व प्रकाशन करने वाली टीम को सलाह दी कि देश – विदेश में जहां संस्कृत पढ़ाई जा रही है वहां के पुस्तकालयों में इस वेद श्रृंखला को पहुँचाने की कोशिश करें.


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुरली मनोहर पाठक ने वेद मंजूषा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इसकी परिकल्पना करना साधारण घटना नहीं रही होंगी. मैं उन दिवंगत पुण्य आत्माओं को नमन करता हूं.

जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस वांगमय को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि वेद शाश्वत मूल्य, सत्य है, वेद धर्म ग्रन्थ नहीं आदर्श ग्रन्थ है. एक तरफ भौतिकता का आयाम है, तो दूसरी तरफ आत्मनिर्भरतता भी इसमें निहित है.

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि स्वामी आर्यवेश ने कहा कि पूरे विश्व में ज्ञान का मूल वेद है. मनुष्य को स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता.

इसे परमात्मा(ब्रम्हा) ने परम्परा से आगे बढ़ाया.कार्यक्रम में हरनाम सिह, इन्दरजीत शर्मा, प्रेम भारद्वाज ज्ञान भिक्षु,, प्रो. पूरन चन्द्र, संदीप तंवर, राजेश सैनी सहित काफ़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे.

कार्यक्रम के दौरान समस्त विशिष्ट अतिथियों का अंग वस्त्र और पौधा तथा वेद मज्जूषा की संक्षिप्त कृति (synopsis ) भेट कर सम्मान किया गया.

सम्मानित होने वाली विभूतियों में दिल्ली हाई कोर्ट मानिटरिग कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरनाम सिह,

अमेरिका से आए वेद प्रेमी भारत गौरव सम्मान से सम्मानित इंदरजीत शर्मा, साहित्यकार कवि प्रेम भारद्वाज “ज्ञान भिक्षु “,पूर्व निगम पार्षद  संदीप तंवर,वरिष्ठ समाज सेवी  राजेश सैनी इत्यादि शामिल हैं .


कार्यक्रम के संयोजन नीता प्रकाशन के निदेशक  राजेश गुप्ता द्वारा किया गया

जिन्होने अपने स्वर्गीय पिता राधेश्याम गुप्ता जी की

परिकल्पना सभी वेदों का हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत मे 20 वर्ष की अवधि की शोध के बाद 17 खण्डो मे महा पुस्तक का विमोचन कराया.

इससे पूर्व कन्या गुरुकुल उड़ीसा की ब्रह्मचाणियों द्वारा शांति पाठ किया गया.कार्यक्रम का संचालन नारदेव आर्य ने किया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button