‘रेत के घर बना करके मैं खुद ही तोड़ देता हूं, मैं खुद ही तीर बनता हूं, मेरा खुद पर निशाना है’
डा.राकेश गौड़ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रवासी भारतीय साहित्यकारों का सम्मान समारोह व कवि सम्मलेन आयोजित

रिपोर्ट -विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली. ‘नहीं मालूम कि मेरा यहां कब तक ठिकाना है,
भीड़ है बहुत और मुझे सबको निभाना है,रेत के घर बना करके मैं खुद ही तोड़ देता हूं, मैं खुद ही तीर बनता हूं, मेरा खुद पर निशाना है.’उक्त मन की गहराई तक छूने वाली पंक्तियों से अंतर्राष्ट्रीय कवि प्रेम भारद्वाज़ ‘ज्ञान भिक्षु’ ने श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया.
श्री प्रेम भारद्वाज वरिष्ठ साहित्यकार, उद्यमी बी. एल. गौड द्वारा डा.राकेश गौड़ चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान मे आयोजित प्रवासी भारतीय साहित्यकारों के सम्मान समारोह व कवि सम्मलेन के विशिष्ठ अतिथि थे.

होटल गौड़ सरोवर पोर्टिंग ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अमेरिका से एनआरआई भारत गौरव से सम्मानित इन्दरजीत शर्मा ने की. मुख्य अथिति नेपाल के प्रसिद्ध डांसर पुरना मान थे.
अन्य विशिष्ठ अतिथियों में कमलेश भट्ट ‘कमल’,रूस से आई साहित्यकार डां स्वेता सिह ‘उमा’,नार्वे से सुरेश चन्द शुक्ल, अमेरिका प्रवासी डां अनीता कपूर , जय वर्मा,नौटिगम से, रेखा राजवंशी आस्टेलिया से डॉ.प्रगति टिप्पणीस रूस से कवि सम्मलेन में देश -विदेश में नाम कमाने वाली जानी मानी कवयित्री डॉ. सरिता शर्मा ने रचना सुनाई ‘ नि:स्वार्थ समर्पण को कमजोरी मत समझो,मन के रिश्ते को कच्ची डोरी मत समझो, तुम पढ़ ना सके यह कमी तुम्हारी अपनी है, मेरे मन की किताब को कोरी मत समझो.

डॉ. जगदीश व्योम ने रचना पढ़ी : इतना भी आसान कहाँ है, पानी को पानी कह पाना. कवयित्री प्रगति टिप्पणीस की रचना कुछ इस प्रकार थी : जीवन चले, थाम आशा का हाथ जग में सदा.कविवर डॉ. वीरेंद्र कुमार शेखर का शेर था : ज़माने से हुआ है वो खफ़ा सा, मिला उसको कोई क्या आईना सा, फैसले जो जरूरी थे टाले गए, मसअले कुछ बना कर उछाले गए.

कार्यक्रम का बखूबी संचालन कर रहीं कवयित्री उर्वशी अग्रवाल ‘उर्वी ‘ ने ‘ मैं शबरी हूं राम की, चखती रहती बेर, तकती राहें राम की हुई कहाँ पर देर’
रचना सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी.कवयित्री रेखा राजवंशी ने रचना पढ़ी ‘फूल कांटों में खिलाये रखिये, दीप रातों में जलाये रखिये.
प्रसिद्ध कवयित्री अनीता कपूर ने ‘ तेरे आंगन की धूप का एक टुकड़ा, मेरे आंगन में भी उतर आया है, चलो आज तो हम कह दें, हम भी, हम प्याला हो गए.
कवयित्री जय वर्मा ने कविता सुनाई : चल निकल चलें, तेरे जहां गुलिस्ता से, कौन जानता है कि राह किधर ले जाय, पार हो जाती है, कोसों कई दूरी जिस दिन बस देहरी पार हो जाये.विविध विधाओं में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहे वरिष्ठ सुरेश चन्द्र शुक्ल, शरद आलोक’ ने काव्यपाठ किया कि बुझा नहीं सकता वह दीपक, ह्रदय में जिसे जलाया है, प्रेम में यह कभी नहीं सोंचे, क्या खोया, क्या पाया है.

वरिष्ठ साहित्यकार व उद्यमी बी. एल. गौड़ ने अपने रचना संसार को कुछ यूं बयां किया ‘पत्थरों की काट से जो जोड़ होता है, तो समझिये कहीं निर्माण होता है,हम किसी के स्वप्न को आकार देते हैं,हैं पुजारी प्रेम के तो प्यार देते हैं,है अज़ब दुनियां कि व्यापारी समझती है,हम मगर सबको दरो दीवार देते हैं ‘

कवयित्री विनीता रानी ‘विन्नी ‘ ने ज़िन्दगी को सारगर्भित करते हुए ‘ बाज़ियाँ बाज़ियाँ बाज़ियाँ ज़िन्दगी, दर्द की दास्तां है यहां ज़िन्दगी सुनाकर वाहवाही लूटी.
इससे पूर्व अतिथि साहित्यकारों व रचनाकारों का सम्मान अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, पुष्प गुच्छ देकर किया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी इंद्रजीत शर्मा ने अपने समाजसेवी जीवन व हिन्दी के न्यूयोर्क, अमेरिका में प्रचार प्रसार की जानकारी दी.अंत मे कार्यकम के मुख्य अतिथि पूरन मान ने फ़िल्मी गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर कार्यकम को संगीतमय बना दिया.




