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किसी भी संगठन में संस्कार और अनुशासन का महत्व सर्वोपरि होता है:महापौर

लखनऊ. महापौर संयुक्ता भाटिया ने महामना मालवीय मिशन की असाधारण आम सभा के उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। महापौर ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया।

इस अवसर पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि भारत रत्न महामना मालवीय का पुण्य स्मरण कर मैं अपने को धन्य मानती हूं।जिन्हें महात्मा गांधी जी ने अपना बड़ा भाई और भारत का निर्माता कहा ,जो एक महान राजनेता और शिक्षाविद थे ,जिन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जो भारत का सबसे बेहतरीन विश्वविद्यालयों में से एक है,उसकी स्थापना की ऐसे महापुरुष को शत शत नमन करती हूं।महामना जैसे युग पुरुष सदियों में कभी कभी अवतरित होते हैं। मैं महामना के श्री चरणों में अपने विनम्र श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूं।

महापौर ने कहा कि महामना के नाम से चलने वाले सामाजिक संगठन के महत्व को आसानी से समझा जा सकता है। यह जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है कि आप सब महामना की स्मृति में सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रकल्प चला रहे हैं। विद्यालय का यह प्रांगण समाज को आपकी अनुपम भेंट है।

महापौर ने कहा कि मुझे ज्ञात हुआ है कि दिल्ली में महामना सम्पूर्ण वाङ्मय तैयार करने का अद्भुत कार्य भी आप सब कर रहे हैं। जो कार्यकर्ता इस काम में लगे हैं वो बहुत बड़ी देश सेवा कर रहे हैं। मैं उनका अभिनंदन करती हूं।

किसी भी संगठन में संस्कार और अनुशासन का महत्व सर्वपरी होता है। मालवीय मिशन में तो सभी समर्पित भाव से काम करने वाले कार्यकर्ता हैं। फिर भी इसमें कोई कमी न आए यह देखना भी संगठन के प्रमुख लोगों का दायित्व है। निस्वार्थ भाव से मालवीय मिशन निरंतर समाज सेवा करता रहे यही महामना के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।




