ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम ने बच्चों को केंद्र में रखकर मानव पूंजी विकास और मजबूत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया

लखनऊ : ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम ने ब्रिक्स देशों के मानव पूंजी सहयोग में बच्चों और किशोरों पर अधिक मजबूत और एकीकृत ध्यान देने का आह्वान किया। फोरम ने शुरुआती बाल्यावस्था में निवेश, अंतिम छोर तक प्रभावी सेवाओं की पहुंच, युवाओं के कौशल एवं नवाचार, लैंगिक समानता और सतत वित्तपोषण को इससे जोड़ने पर जोर दिया।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत यूनिसेफ इंडिया के साथ साझेदारी में इस फोरम का आयोजन किया। फोरम की थीम थी-‘बच्चों में निवेश, भविष्य को सुरक्षित करना: ब्रिक्स के अगले दशक के लिए मानव पूंजी।’ इसमें भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विकास साझेदार और युवा प्रतिनिधि शामिल हुए।
श्रीमती बेबी रानी मौर्य, कैबिनेट मंत्री, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पोषण, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि भले ही देशों की परिस्थितियां अलग-अलग हों, लेकिन हर बच्चे को आगे बढ़ने और बेहतर जीवन का अवसर देने की साझा आकांक्षा है। उन्होंने कहा कि यही साझा प्रतिबद्धता ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम की चर्चाओं का केंद्र है, जिसका उद्देश्य बच्चों के कल्याण, विकास और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि ब्रिक्स देशों के बीच पहले से ही स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, युवा विकास, नवाचार और वित्तीय सहयोग के क्षेत्रों में काम हो रहा है। प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार किया कि इन सभी क्षेत्रों को बच्चों और किशोरों को केंद्र में रखते हुए, जीवन के हर चरण के अनुसार बेहतर तरीके से जोड़ा जाए। जिसमें बच्चों और किशोरों को मानव पूंजी के विकास, आर्थिक मजबूती और समावेशी विकास के केंद्र में रखा जाए।
यूनिसेफ इंडिया के कार्यवाहक प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा, “ब्रिक्स देशों में एक अरब से अधिक बच्चे रहते हैं, जो दुनिया के कुल बच्चों की संख्या का लगभग आधा हैं। उनका स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और निर्णय लेने की क्षमता ही ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों की भविष्य की ताकत तय करेगी।”
फोरम ने भविष्य के सहयोग के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें जीवन के हर चरण में निवेश को सुरक्षित और मजबूत करना, एकीकृत, समान और जवाबदेह सेवा-प्रणालियों के जरिए क्रियान्वयन को बेहतर बनाना व ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग तंत्र विकसित करना शामिल हैष
चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि सिर्फ वित्तीय संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों के लिए प्रभावी परिणाम हासिल करने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों और स्तरों के बीच बेहतर समन्वय, स्थानीय संस्थानों को मजबूत करना, बच्चों और समुदायों की सार्थक भागीदारी तथा कार्यक्रमों के निर्माण और क्रियान्वयन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना जरूरी है।



