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स्वर्गीय केदारनाथ साहनी की 100वीं जन्म जयंती पर दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने विशेष जन्मशती समारोह का आयोजन किया

नई दिल्ली : वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व राज्यपाल, पूर्व दिल्ली के मुख्य कार्यकारी पार्षद एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष स्वर्गीय श्री केदारनाथ साहनी की 100वीं जन्म जयंती पर दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर में विशेष जन्मशती समारोह का आयोजन किया।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित श्री केदारनाथ साहनी जन्मशती समारोह का उद्घाटन केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली विधानसभाध्यक्ष  विजेन्द्र गुप्ता, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. हर्षवर्धन और स्वर्गीय साहनी जी के पुत्र  प्रदीप साहनी एवं अन्य परिजनों की उपस्थिती में दीप प्रज्वलन करके किया।

दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष  राजेश भाटिया द्वारा संचालित समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता  रामभज,  मूलचंद चावला,  चंदराम,  ओम प्रकाश शर्मा,  जगदीश मुखी, महेश चंद्र शर्मा, आर.एस.एस. से  दयानंद जी के आलावा जलबोर्ड के चेयरमैन  सतीश उपाध्याय, सांसद  रामवीर सिंह बिधूड़ी, विधायक  हरीश खुराना एवं  जितेंद्र महाजन, नगर निगम में उपनेता  जयभगवान यादव और प्रदेश पदाधिकारी  विष्णु मित्तल,  योगिता सिंह और  मोहन लाल गिहारा,  विक्रम बिधूड़ी,  रंजीत कश्यप,  गौरव खारी,  संतोष पाल,  संतोष ओझा,  शुभेंदु शेखर अवस्थी,कैलाश जैन,  अमित गुप्ता आदि सम्मिलित हुए।

अपने स्वागत भाषण में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  हर्ष मल्होत्रा ने कहा आज हम उस व्यक्तित्व की 100वीं जन्म जयंती मना रहे हैं जो अपने आप में मर्यादा, सौम्यता और सहनशीलता की जीवंत परिभाषा थे — हमारे वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यपाल, दिल्ली के प्रथम मुख्य कार्यकारी पार्षद और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष श्री केदारनाथ साहनी जी*।

साहनी जी केवल नेता नहीं थे, वो हर कार्यकर्ता के मित्र थे। संगठन में आने वाले सबसे छोटे कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ पदाधिकारी तक, सबके लिए उनके दरवाजे और दिल दोनों खुले रहते थे। किसी कार्यकर्ता को रात 12 बजे भी कोई समस्या हो तो साहनी जी कहते थे “बेटा, आ जाओ, बैठकर बात करते हैं”। यही आत्मीयता उन्हें कार्यकर्ताओं का ‘प्रिय’ बनाती थी।

राजनीति में उनका पूरा जीवन त्याग, अनुशासन और शालीनता का पाठ था। जब वो बोलते थे तो विरोधी भी सुनते थे, क्योंकि उनकी भाषा में कटुता नहीं, तर्क था। जब वो सुनते थे तो सामने वाले की पूरी बात धैर्य से सुनते थे। राज्यपाल के गरिमामय पद पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी जमीनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा। दिल्ली के मुख्य कार्यकारी पार्षद और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को जमीन से जोड़ा।

आज जिस दिल्ली भाजपा को हम देख रहे हैं, उसकी नींव रखने में तीन स्तंभों की बड़ी भूमिका रही — *केदारनाथ साहनी जी, विजय कुमार मल्होत्रा जी और मदनलाल खुराना जी*। ये तीनों अलग-अलग स्वभाव के थे, पर दिल्ली के विकास और संगठन विस्तार के लिए एकजुट थे। लोग इसे “साहनी-मल्होत्रा-खुराना की तिकड़ी” कहकर याद करते हैं। इस तिकड़ी ने कार्यकर्ता को परिवार माना और परिवार को ही संगठन बनाया।

आज जब राजनीति में शब्दों की मर्यादा टूट रही है, तब साहनी जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि सत्ता से बड़ी सेवा है, और पद से बड़ी प्रतिष्ठा चरित्र है।

आइए, हम सब संकल्प लें कि साहनी जी के आदर्शों — कार्यकर्ता को सम्मान, विरोधी को मर्यादा, और राष्ट्र को सर्वोपरि — को अपने जीवन में उतारेंगे।

श्री मल्होत्रा ने कहा यही साहनी जी 100वीं जयंती पर साहनी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

विधानसभाध्यक्ष  विजेंद्र गुप्ता ने केदारनाथ साहनी जी के शताब्दी जन्मोत्सव के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि साहनी जी का व्यक्तित्व अत्यंत शालीन, सहज और आत्मीय था। उनकी मुस्कान, उनका व्यवहार और उनका अपनापन आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें साहनी जी को नजदीक से जानने और समझने का अवसर मिला। उन्हें याद है कि जब वे लगभग 18-19 वर्ष के थे, तब अपनी बहन के विवाह समारोह में उनकी साहनी जी से मुलाकात हुई थी। उस समय साहनी जी का स्नेह, सहजता और आशीर्वाद उनके मन पर गहरी छाप छोड़ गया, जिसकी स्मृतियां आज भी उनके साथ हैं।

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपने सम्बोधन में केदारनाथ साहनी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि साहनी जी का संपूर्ण जीवन संगठनात्मक अनुशासन, वैचारिक प्रतिबद्धता, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और समाजसेवा की प्रेरणादायी मिसाल है। उन्होंने भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अपने नेतृत्व, दूरदर्शिता और व्यवस्थित कार्यशैली से संगठन को नई दिशा प्रदान की।

श्री नड्डा ने कहा कि केदारनाथ साहनी जी की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी व्यवस्थित कार्यशैली और संगठनात्मक प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिबद्धता प्रमुख थी। आज जिस SOP (Standard Operating Procedure) की चर्चा की जाती है, साहनी जी संगठन के कामकाज में स्पष्ट कार्यप्रणाली और निर्धारित प्रक्रियाओं के महत्व पर बहुत पहले से जोर देते थे। वे किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले उससे जुड़े सभी पक्षों को सुनने, संबंधित लोगों से विचार-विमर्श करने और प्रत्येक पहलू को समझने पर बल देते थे। उनका मानना था कि किसी भी निर्णय की सफलता केवल उसके परिणाम में नहीं, बल्कि उसे लेने की पूरी प्रक्रिया में निहित होती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केदारनाथ साहनी जी केवल एक संगठनकर्ता नहीं, बल्कि ऐसे नेता थे जो कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करते थे। वे उन्हें केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों, समस्याओं और कार्यों की नियमित जानकारी लेते थे। वे प्रतिदिन सुबह कार्यकर्ताओं से पूछते थे कि क्या काम हुआ है, कौन कहां जाएगा और किसकी क्या जिम्मेदारी है। शाम को भी वे दिनभर के कामकाज की समीक्षा करते और कार्यकर्ताओं से विस्तार से बातचीत करते थे। उनका उद्देश्य केवल अभियान की प्रगति जानना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखना और उन्हें संगठन के लक्ष्य के प्रति पूरी ऊर्जा से समर्पित करना था।

श्री नड्डा ने कहा कि साहनी जी के नेतृत्व में चुनावी अभियान को नई गति देने की अद्भुत क्षमता थी। जब कोई अभियान शिथिल पड़ जाता था, तब वे कुछ ही दिनों में उसमें नई ऊर्जा और उत्साह भर देते थे। शिमला हो, हिमाचल प्रदेश की राजनीति हो या कांग्रेस के विरुद्ध चुनावी संघर्ष, हर परिस्थिति में उनका नेतृत्व महत्वपूर्ण साबित होता था। उन्होंने बताया कि भाजपा के शुरुआती चुनावी अभियानों में भी साहनी जी का मार्गदर्शन उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। आडवाणी जी के चुनाव में युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी भी साहनी जी ने उन्हें सौंपी थी।

उन्होंने कहा कि साहनी जी का नेतृत्व उनकी कार्यकर्ताओं के प्रति चिंता, संवाद की शैली और प्रत्येक व्यक्ति को महत्व देने की भावना से परिभाषित होता था। वे वरिष्ठ होने के बावजूद कार्यकर्ताओं के साथ घंटों अनौपचारिक चर्चा करते थे। वे जानते थे कि संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं और उनकी ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा सक्रियता बनाए रखना नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

विधानसभाध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने केदारनाथ साहनी जी के शताब्दी जन्मोत्सव के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि साहनी जी का व्यक्तित्व अत्यंत शालीन, सहज और आत्मीय था। उनकी मुस्कान, उनका व्यवहार और उनका अपनापन आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत हैं।

श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें साहनी जी को नजदीक से जानने और समझने का अवसर मिला। उन्हें याद है कि जब वे लगभग 18-19 वर्ष के थे, तब अपनी बहन के विवाह समारोह में उनकी साहनी जी से मुलाकात हुई थी। उस समय साहनी जी का स्नेह, सहजता और आशीर्वाद उनके मन पर गहरी छाप छोड़ गया, जिसकी स्मृतियां आज भी उनके साथ हैं।

 

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