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मौलाना फरीदुल हसन ने किया 12 मुहर्रम की मजलिस को खिताब

रौज़ा-ए-ज़ैनबिया में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

लखनऊ। अज़दारी के ऐतिहासिक शहर अदब और अक़ीदत की नगरी लखनऊ में मुहर्रम का ग़म अपनी पूरी रूहानियत के साथ जारी है। इसी सिलसिले में टिकट राय तालाब स्थित रौज़ा-ए-ज़ैनबिया के अज़ाखाने में 12 मुहर्रम की एक अज़ीमुश्शान मजलिस और शबीही जुलूस का आयोजन किया गया। इस मुक़द्दस महफ़िल-ए-ग़म को मुल्क के मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना फरीदुल हसन साहब ने अपने मख़सूस और पुरअसर अंदाज़ में ख़िताब किया।

शहीदान-ए-कर्बला की याद में सजी इस मजलिस में अकीदतमंदों का एक सैलाब उमड़ पड़ा, जिनकी आँखों से बहते आँसू इमाम हुसैन अ.स. और उनके जाँनिसारों के प्रति सच्ची अक़ीदत पेश कर रहे थे।

 

मिंबर-ए-रसूल से मोमिनों को संबोधित करते हुए मौलाना फरीदुल हसन साहब ने कर्बला के मर्म और शहादत के बाद के मंज़र को बेहद पुरदर्द अंदाज़ में पेश किया। उन्होंने फरमाया।

12 मुहर्रम का सूरज इंसानी तारीख के उस सबसे बड़े जुल्म का गवाह है, जब कर्बला के मैदान में सब कुछ लुटा देने के बाद नबी के कुनबे अहल-ए-बैत की पाक खवातीन और बेगुनाह बच्चों को कैदी बनाकर कूफ़े के बाज़ारों की तरफ ले जाया जा रहा था।

मौलाना ने सानी-ए-ज़हरा जनाब-ए-ज़ैनब स.अ. के बेमिसाल सब्र और उनके द्वारा दिए गए खुतबों का ज़िक्र करते हुए कहा कि अगर कर्बला को हुसैन ने ज़िंदा किया है, तो कर्बला के संदेश को दुनिया भर में ज़ैनब ने फैलाया है। मौलाना के इस पुरदर्द बयान को सुनकर पूरा इमामबाड़ा या हुसैन-या हुसैन की गूंज और सिसकियों से सोगवार हो उठा।

मजलिस के इख़्तेताम पर रौज़ा-ए-ज़ैनबिया से एक रिवायती शबीही जुलूस बरामद हुआ। गमगीन माहौल में अज़ादारों ने मातम और सीनाज़नी कर कर्बला के असीरों को पुरसा दिया। स्थानीय अंजुमनों ने जब दर्दभरे नौहे पढ़े, तो हर आँख छलक उठी।

ज़ायरीन की भारी आमद को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा, सफ़ाई और अक़ीदतमंदों की सहूलियत के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे, जिससे यह पूरी मजलिस और जुलूस अक़ीदत व एहतराम के साथ संपन्न हुआ।

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