विदाई की भावुक बेला, जब पुलिस अफसरों की विदाई पर रो पड़ी जनता
अधिकारियों का तबादला या परिवार के सदस्य की विदाई

लखनऊ। पुलिस विभाग में तबादले और विदाई तो एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ अधिकारी जनता के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ जाते हैं कि उनका जाना एक परिवार के बिछड़ने का गम बन जाता है। ऐसा ही एक बेहद भावुक नजारा तब देखने को मिला, जब एसीपी चौक और एसीपी बाजार खाला के विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष विदाई समारोह में डीसीपी पश्चिम ने खुद मुख्य रूप से पहुँचकर दोनों अधिकारियों को सम्मानित किया और उन्हें विदाई दी।
इस समारोह में क्षेत्र के तमाम सम्मानित नागरिक प्रबुद्ध वर्ग और सामाजिक संगठन भारी संख्या में मौजूद रहे। वहाँ मौजूद लोगों का कहना था कि दोनों अधिकारी केवल वर्दी में तैनात अफसर नहीं थे, बल्कि वे इस क्षेत्र के लोगों के लिए एक परिवार के सदस्य जैसे बन चुके थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जनता के साथ इस कदर मेल-जोल बढ़ाया कि हर वर्ग का व्यक्ति उनसे सीधे जुड़ाव महसूस करता था। वे हमेशा लोगों के सुख-दुख में एक सजग प्रहरी और मददगार बनकर खड़े नजर आते थे, जिसके कारण सामाजिक लोग उनका बहुत सम्मान करते थे।
जब विदाई की अंतिम घड़ी आई, तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। क्षेत्र के सामाजिक लोग और स्थानीय नागरिक इतने भावुक हो गए कि वे अपने आँसू नहीं रोक पाए और फूट-फूट कर रोने लगे। जनता का अपने प्रति ऐसा अगाध प्रेम, मान-सम्मान और अपनापन देखकर दोनों विदा होने वाले अधिकारी भी खुद को संभाल नहीं पाए और उनकी आँखें भी छलक आईं। हर कोई भावुक था और माहौल में एक अजीब सी खामोशी और भारीपन छा गया था।
इस मौके पर डीसीपी पश्चिम ने दोनों अधिकारियों के कार्य और उनकी जनता के प्रति संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस का असली काम केवल कानून व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास जीतना भी है, जिसे इन दोनों अधिकारियों ने बखूबी कर दिखाया है। यह विदाई समारोह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर कोई अधिकारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से जनता की सेवा करे, तो लोग उसे अपने परिवार का हिस्सा मान लेते हैं। अंत में नम आँखों और भारी मन से दोनों अधिकारियों को उनके अगले सफर के लिए शुभकामनाएं देकर विदा किया गया।



