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परिवहन मंत्री के निर्देश पर परिवहन विभाग 01 जुलाई से बसों के खिलाफ चलाएगा विशेष जांच अभियान

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दयाशंकर सिंह के निर्देश पर परिवहन विभाग 01 जुलाई, 2026 से 31 जुलाई, 2026 तक स्कूली बसों के फिटनेस संबंधी जांच के लिए अभियान चलाएगा। अभियान का लक्ष्य न केवल नियम लागू करना है, बल्कि स्कूल परिवहन को एक सुरक्षित जवाबदेह और पारदर्शी सेवा बनाना है। अभियान के तहत बसों की तकनीकी खराबी, फिटनेस, सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही चालकों का भी भौतिक सत्यापन, जांच इत्यादि की जाएगी। जांच में बस बॉडी की संरचना, बस की छत की निर्धारित भार मानक के अनुसार मजबूती, सीट एवं सीट एंकरेज टेस्ट, बॉडी चेसिस माउंटिंग टेस्ट, आपातकालीन गेट इत्यादि पर विशेष फोकस रहेगा। साथ ही बसों में क्षमता के अनुरूप (02 केजी) एबीएस टाइप, ड्राई पाउडर, फायर उपकरण की जांच की जाएगी।

अभियान के दौरान यह भी देखा जाएगा कि स्कूल बसों के लिए अधिनियम 125-सी सीएमवीआर 1989 के उपनियम 02 के तहत विशेष मानक निर्धारित किए गए है। उनका पालन किया जा रहा है या नही। इसके अंतर्गत बसों को गोल्डन यलों रंगों में रंगा होना, उसमें स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना अनिवार्य है। इसके अलावा आपातनिकास, स्टॉप सिंग्नल आर्म, हैजर्ड वार्निंग सिस्टम एवं बच्चों की आवश्यकता के अनुसार डिजाइन भी अनिवार्य है। बसों में स्पीड गवर्नर इलेक्ट्रानिक उपकरण, जो वाहन की अधिकतम गति निर्धारित सीमा से अधिक नही होने देता है, भी लगा होना चाहिए। स्कूल बसों की अधिकतम गति सामान्यतः 40कि0मी0 प्रतिघंटा निर्धारित है। इसके अलावा बसों में ब्रेक प्रणाली, टायर व सस्पेंशन, लाइटिंग और संकेतक के साथ-साथ वैध दस्तावेजों (आरसी, परमिट बीमा, पीयूसी और वैध फिटनेस) की भी जांचñ की जाएगी।
अभियान में प्रवर्तन दल नियमानुसार बसों के फिटनेस की जांच करेगा। निरीक्षण में अनियमितता पाए जाने पर उनके खिलाफ चालान, वाहन निरूद्ध, फिटनेस निलंबन इत्यादि की कार्यवाही की जाएगी।

 

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