शाही ज़री के जुलूस के साथ मोहर्रम का आग़ाज़
पश्चिम पुलिस के पुख्ता इंतज़ामों के बीच निकला पहली मोहर्रम का शाही जुलूस

मोहम्मद सैफ साबरी
लखनऊ। अदब और तहज़ीब के शहर लखनऊ में हर साल की तरह इस मर्तबा भी पहली मोहर्रम का ऐतिहासिक शाही ज़री का जुलूस अपनी पूरी रवायती शान-ओ-शौकत और अक़ीदत के साथ निकाला गया। अल-सुबह से ही फिज़ा में कर्बला के शहीदों की याद और गम-ए-हुसैन का अहसास नुमाया था। आशिक़-ए-इमाम के बुलंद हौसलों और अक़ीदत के साए में शुरू हुआ यह जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों से होता हुआ ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े पर जाकर मुकम्मल हुआ।
यह जुलूस सिर्फ एक धार्मिक रवायत भर नहीं है, बल्कि यह लखनऊ की साझी संस्कृति का आईना भी है। जुलूस के हमराह चल रहे लाल, पीले और हरे रंग के परचम और उनके पीछे चलते हाथी-घोड़े, पुराने दौर के शाही लवाजमे और ऐतिहासिक वैभव की याद ताज़ा कर रहे थे। इस जुलूस की रूहानियत इस बात से और गहरी हो जाती है कि इसमें सुन्नत-वल-जमात के लोग भी पूरी शिद्दत के साथ शामिल हुए। शिया-सुन्नी समुदाय की यह मुश्तरका मौजूदगी शहर के उस भाईचारे को तस्दीक करती है, जो लखनऊ की असल पहचान है।
मोहर्रम के आग़ाज़ के साथ ही अमूमन शांत दिखने वाले खाकी के कंधों पर ज़िम्मेदारी का बोझ कई गुना बढ़ जाता है। लखनऊ में अज़ादारी का यह सिलसिला यूं तो लगभग सवा दो महीने तक चलता है, लेकिन शुरुआती दस दिन कानून-व्यवस्था के लिहाज़ से बेहद हस्सास माने जाते हैं। पहले ही दिन से पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी ज़मीन पर साफ नज़र आई।
अमन में खलल डालने वाले हुड़दंगियों और पुराने अपराधियों का पुराना रिकॉर्ड खंगालकर उन पर पहले ही कड़ा पहरा बिठा दिया गया था। ज़िलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने खुद कमान संभालते हुए संवेदनशील इलाक़ों का दौरा किया और उलेमा व धर्मगुरुओं के साथ बैठकें कीं। वहीं, ज्वाइंट कमिश्नर और डीसीपी (पश्चिम) ने जगह-जगह शांति बैठकें कर अवाम के बीच सुरक्षा का भरोसा पैदा किया।
चप्पे-चप्पे पर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ गैर-जिलों से बुलाई गई अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात रही। आसमान से ड्रोन कैमरों की तीसरी आंख जुलूस के हर मोड़ पर पैनी नज़र रखे हुए थी, जिसके साए में पहला जुलूस सकुशल संपन्न हुआ।
तकनीक के इस दौर में अमन को महफूज़ रखने के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कड़ा पहरा बिठाया है। प्रशासन ने साफ लफ़्ज़ों में हिदायत दी है कि फेसबुक, व्हाट्सएप या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भ्रामक, भड़काऊ या झूठी ख़बरें फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अफवाह फैलाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बहरहाल, पहले मोहर्रम का जुलूस तो प्रशासन की चौकसी और अवाम के सहयोग से अमनो-अमान के साथ मुकम्मल हो गया, लेकिन आने वाले दिनों की संवेदनशीलता को देखते हुए आला अधिकारी खुद मैदान में डटे हुए हैं। खाकी की मुस्तैदी और अवाम की अक़ीदत का यह तालमेल ही है जो लखनऊ की रवायतों को हमेशा महफ़ूज़ रखता है।



