‘संघ गंगा के तीन भगीरथ’ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रथम तीन सर संघ चालक के जीवन चरित्र व कृतित्व की यशोगाथा का नाट्य मंचन

रिपोर्ट -विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रथम तीन सर संघ चालक के जीवन चरित्र तथा उनके कृतित्व की यशोगाथा का नाट्य मंचन ‘संघ गंगा के तीन भगीरथ’ शीर्षक से 18 अप्रैल 2026 को किया गया.
महाराजा अग्रसेन कॉलेज, न्यू अशोक नगर, दिल्ली के ऑडिटोरियम में मंचित नाटक संघ गंगा के तीन भगीरथ के लेखक श्रीधर गाडगे हैं जबकि निर्देशन संजय पेंडसे ने किया. सान्निध्य प्रो. संजीव तिवारी का रहा.

राधिका क्रिएशन्स, नागपुर की ओर से गुरूजी गोलवलकर जी की जीवनी पर 2006 में प्रस्तुत किए गए ‘इदम न मम’ नाटक के 137 प्रयोगों के उपरान्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शतक महोत्सवी वर्ष के उपलक्ष्य में नाटक संघ गंगा के तीन भगीरथ का शुभारम्भ 30 अप्रैल 2025 को नागपुर स्थित वानमती सभागार वी आई पी रोड को किया गया था.

नाटक संघ गंगा के तीन भगीरथ में संघ के तीन सरसंघचालको के जीवन के कुछ प्रमुख प्रसंगों का
नाट्यकरण और कथानक को कालानुरूप प्रवाहित रखने के लिए बीच-बीच में भारतमाता की प्रस्तावना देते हुए नाटक को धाराप्रवाह के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
प्रथम अंक मे प्रस्तावना के साथ डॉ. हेडगेवारजी का बाल्यकाल, वंदेमातरम का प्रसंग, काँग्रेस अधिवेशन पूर्व की स्थिती, संघ स्थापना का संकल्प, संघकार्य विस्तार, महात्मा गांधी – हेडगेवार भेट के प्रसंग दिखाए गए। अर्थात डॉ. हेडगेवार का क्रांति कार्य, काँग्रेस कार्य और सरसंघचालक के नाते कार्य इस नाटक का आधार था.।

दूसरे अंक में प्रस्तावना के साथ श्री गुरुजी का सारगाछी का जीवन, अखंडानंद के साथ वार्ता, नागपुर वापसी, डॉ. हेडगेवार से भेट, डॉ. हेडगेवार का अंतिम भाषण, गुरुजी का सरसंघचालक बनना, वल्लभभाई पटेल गुरुजी वार्ता, कश्मीर का विलीनीकरण, संघ बंदी, बालासाहेब का सरसंघचालक बनना, आपातकाल सत्याग्रह, रामजन्मभूमि आंदोलन, आदि प्रसंग लिए गए । गुरुजी और बालासाहेब देवरस के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया।

1889 से 1996 अर्थात 107 वर्षों का कालखंड इन तीन महान विभूतियों के परिप्रेक्ष्य में दर्शकों के सम्मुख खड़ा करने का यह प्रयास था । संघ का कार्य भारत में 100 वर्षों से निरंतर चल रहा है। यह एक अविरल प्रवाह है – गंगाप्रवाह के समान। इसलिए इसे ‘संघ गंगा’ कहा है और इसे निरंतर प्रवाहित रखने के लिए जिन्होंने नेतृत्व किया है -उन्हे भगीरथ कहा है। संघ के लिए भगीरथ परंपरा बनी है। उसका दर्शन कराने का यह छोटा सा प्रयास है।
नाटक में ध्वनि संचालन उत्तम नहीं था जिससे कलाकार असहजता महसूस कर रहे थे. प्रकाश परिकल्पना अच्छी थी. लगभग 27 दृश्यों में मंचित इस नाटक के पात्रों ने दर्शकों को बांधे रखा. निर्देशन क्षमता प्रभावी थी. नाटक के किरदारों ने सुन्दर प्रदर्शन किया.

नाटक के कलाकारों में अनिकेत मुंशी, मनीष उइके, सारिका पेंडसे,रवि दत्त हलवे, सुरेन्द्र हरडे, प्रद्दूमन बायस्कर, नचिकेत म्हैसाळकर, राधिका सेनाड, मीनल मुंडले, स्वप्नगंधा खटी, संकल्प पायाल,चिन्मय देशकर,शैलेश भलमे, मधुस्मिता गहलोद, स्वप्निल जतकर, मल्हार रानडे, अनूप रानडे, यशवंत चोपडे, अनिकेत गोडाणे, हेमन्त जिचकार अंजलि जोशी,शांतनु मगरूलकर,रमन सेनाड,
, प्रज्वल भोवर, सुधीर चिटणीस, अंतरा देशपांडे, अभिषेक काणे, रमेश शेळके आशिष पवार, सौरमा मसराम थे.



