भाकपा की मांग- समय पर हों उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

नई दिल्ली/ लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि वह त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में संभावित हार के भय से तथा पंचायत निकायों में मौजूद जनता के धन को हड़पने की नीयत से इन चुनावों को टालने के प्रयासों में जुटी है। भाकपा ने मांग की उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर ही कराये जायें।
एक प्रेस बयान में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों से लोगों के माध्यम से सूचनायें मिल रही हैं कि भाजपा के हल्कों में यह चर्चा व्यापक रूप से होरही है कि पंचायत चुनावों में भाजपा बुरी तरह हार जायेगी। भाजपा अच्छी तरह जानती है कि उसके खोखले दावों और जनता से किये गये छल के चलते उत्तर प्रदेश , देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी साख और छवि बुरी तरह गिर गयी है, और नाराज जनता उन्हें हर स्तर पर बाहर का रास्ता दिखाना चाहती है। गत लोकसभा चुनाव परिणामों से भी यह स्पष्ट हो चुका है। अतएव विधान सभा चुनाव से पूर्व होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को कराने से वह बुरी तरह घबरा रही है।
भाजपा के चुनावों से दूर भागने का दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होने पर भाजपा उनमें प्रशासक मनोनीत करने की योजना बना रही है। ताकि विकास के लिये पंचायत निकायों के पास मौजूद जनता के धन को प्रशासकों के माध्यम से हथिया सके और उस धन का उपयोग विधान सभा चुनावों में सत्ता पर पुनः कब्जा करने के लिए कर सके। उपर्युक्त दोनों ही तथ्यों की पुष्टि भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय ने भी की है।
अतएव भाकपा ने चेतावनी दी है कि अपने निजी हितों के लिये लोकतन्त्र की बलि चढ़ाने की चेष्टा से भाजपा बाज आये, और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर ही कराये जाएँ। वरना जनता कि जिस आक्रोश से वह बचना चाहती है, वह बढ़ेगा ही। घटेगा नहीं।
बयान में भाकपा ने इस मांग को भी पुनः दोहराया है कि अन्य कई राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर कराये जायें।



