उत्तर-प्रदेशनई दिल्लीबड़ी खबरलखनऊ

लाज शरम सब छोड़ी, एप्सटीन से नैना मिलाय के…!

बादल सरोज

लोक लाज, मान मर्यादा, उत्तरदायित्व, सामाजिक शिष्टाचार, शुचिता, मानव मूल्य, निजी जीवन के नैतिक मानदंड वगैरा-वगैरा सभ्य समाज के हर पैमाने को, धड़ल्ले से जूते की नोक पर रखने का, जितना माद्दा ‘व्यक्ति निर्माण ही देश निर्माण है’ का दावा करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजनीतिक मोर्चे के आनुषांगिक संगठन भारतीय जनता पार्टी में है, उतना दुनिया की किसी और पार्टी में नहीं है। इसका एक और नमूना, दुनिया भर को चौकाने वाला नमूना, उसने हाल ही में पेश कर दिखाया। इधर अमरीका में एप्सटीन फाइल नाम से मशहूर कुकर्मियों के कारनामे की नयी खेप जारी हुई, उधर भाजपा ने इसमें इस कलंकित दुराचारी के साथ दरबार करते दिखाई दे रहे हरदीप पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा में पहुंचाने के लिए अपना उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया। वह भी तब, जब इस कुख्यात कांड में अपनी लिप्तता को लेकर दी गयी उनकी सफाई साफ़-साफ़ झूठी साबित हो चुकी थी और इस तरह उन्होंने मंत्रिमंडल से बर्खास्त होने की योग्यता अर्जित कर ली थी। मोदी-शाह ने उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश का रास्ता निकाल लिया।
दुनिया भर में एपस्टीन फाइलों के संबोधन से कुख्यात फाइल्स उन अमरीकी सरकारी, कानूनी और जांच संबंधी दस्तावेजों का एक बड़ा संग्रह है, जो अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन और उसके सहयोगियों से जुड़े मामलों में जुटाए गए थे। जेफरी एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी और शोषण का नेटवर्क चलाने के आरोप थे। इस तरह के अनेक वीडियो और तस्वीरों के जखीरे बरामद हुए थे, जिनमें नाबालिग लड़कियों के साथ कुत्सित यौन संबंध बनाते हुए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित पूर्व राष्ट्रपति और दुनिया की अनेक नामी हस्तियाँ नजर आई थीं। यौन सामर्थ्य बढाने के लिए बच्चियों और युवतियों की हत्या, यहाँ तक कि मानव अंगों के सेवन तक की बातें सामने आई थीं।

एपस्टीन ने उन व्यक्तियों की एक सूची ही तैयार नहीं की थी, जिन्हें वह नाबालिग लड़कियों को मुहैया कराता था, बल्कि जो उनके साथ किया जाता था, उसकी वीडियो और फोटोग्राफ्स भी इकट्ठा किया करता था। उनसे हुए मेल इत्यादि भी सुरक्षित रखता। इस सामग्री का उपयोग वह उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए करता था। एक अन्य मामले में गिरफ्तार होने के बाद 2019 में जेल में ही उसकी मृत्यु हो गयी थी, जिसे आत्महत्या बताया गया, मगर सभी जानते हैं कि वह उसके “ग्राहकों” की सुरक्षा के लिए की गयी हत्या थी।

एप्सटीन की कारगुजारियां इतनी भयानक, घिनौनी और गलाजत भरी थीं कि पूरी दुनिया में क्षोभ और रोष की लहर उठ खड़ी हुई। जब-जब, जिन-जिन के नाम आये, तब-तब उन लोगों को अपनी-अपनी जगहों से इस्तीफे देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नॉर्वे और स्लोवाकिया जैसे देशों में प्रमुख अधिकारियों और प्रमुख पदों पर बैठे लोगों ने दस्तावेजों में नाम आने के बाद इस्तीफे दिए हैं। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री के एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने जेफरी एपस्टीन के साथ साझा किए गए संदेशों और बातचीत के खुलासे के बाद इस्तीफा दे दिया। नॉर्वे की पूर्व राजदूत मोना जूल ने भी एपस्टीन की वसीयत से जुड़े खुलासों के बाद अपना पद छोड़ दिया। वे इजरायल, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र में नॉर्वे की राजदूत भी रह चुकी थी। ख़बरों के मुताबिक, दुनिया भर के 20 से अधिक देशों में असर देखा गया है, जहाँ 80 से अधिक प्रभावशाली लोग पहली खेप जारी होने के बाद जांच के घेरे में आ गए। बिल गेट्स को भी अपने फाउंडेशन बोर्ड से हटना पड़ा। डीपी वर्ल्ड के सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायेम को भी इस्तीफा भी देना पड़ा।

अमरीकी जस्टिस डिपार्टमेंट के दस्तावेजों में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के चीफ और प्रेसिडेंट, बोर्गे ब्रेंडे और एपस्टीन के बीच सालों पहले हुई बातचीत सार्वजनिक हुई, जिसमें वर्ष 2008 में एक नाबालिग से दैहिक संबंध बनाने की जानकारी थी। ब्रेड़े ने गलती मानी और इस्तीफा दे दिया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट लॉरेंस एच. समर्स को एकेडमिक साल के आखिर में इस मशहूर यूनिवर्सिटी में अपने पद से हटने का एलान करना पड़ा। ये श्रीमान पूर्व प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन के अंडर ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा के इकोनॉमिक एडवाइजर रहे थे। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा। उनके बारे यह जानकारी सामने आई कि उन्होंने किसी ख़ास व्यक्ति को अमरीका में राजदूत बनवाने के लिए एप्सटीन से बात की थी। एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी विवाद के बीच पद छोड़ दिया। फ्रांस में पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया।

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम कुकर्मी जेफ्री एपस्टीन की फाइल्स और ईमेल डेटासेट में सामने आने के बाद उनके इस्तीफे की भी मांग उठी। जारी किए गए दस्तावेजों और तस्वीरों में हरदीप सिंह पुरी को जेफ्री एपस्टीन के साथ मैनहट्टन स्थित उसके टाउनहाउस में मुलाकातों के दौरान देखा गया है। रिकॉर्ड्स के अनुसार, दोनों के बीच 2014 से 2017 के दौरान करीब 62 ईमेल मिले। इसके अलावा अनेक और बैठकें भी हुई थीं, जिनके रिकॉर्ड सामने आये। हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातें पूरी तरह से पेशेवर थीं। वे उससे अकेले में कभी नहीं मिले : जब भी मिले तब अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले। उन्होंने एपस्टीन के किसी भी आपराधिक कृत्य से अपना कोई भी संबंध होने से साफ इनकार किया। मगर पिछले सप्ताह जब मार्को रुबियो अम्बानी से तेल सफाई का करार करने आये, ठीक तभी कुछ नयी तस्वीरें जारी हुईं, जो हरदीप पुरी के दावे का खंडन करती थी : जो ये बताती थीं कि हमेशा प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने और कभी अकेले न मिलने का पुरी का दावा झूठा था। वह एप्सटीन के साथ अकेले में वह भी उस कुख्यात कमरे में नजर आये, जिस कमरे के विडियोज बाकी लोगों की यौन क्रीड़ाओं के समय दिखे हैं। एप्सटीन कांड के जानकार बताते हैं कि तस्वीर में बिछी हुई चादर भी वही है, जो अन्य मामलों में देखी गयी है।

स्वाभाविक ही था कि इस झूठ के उजागर होने के बाद इस मंत्री को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना एकमात्र स्वाभाविक अपेक्षा थी – मगर बजाय ऐसा करने के ‘संस्कारी’ संगठन के नियंत्रण में चलने वाली ‘सदाचारी’ पार्टी ने मंत्रिमंडल में उसकी निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उसे मध्यप्रदेश से राज्यसभा में ले जाने का रास्ता चुना। हरदीप सिंह पुरी वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद है और उनका कार्यकाल इस साल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कथित रूप से नए चेहरों को मौका देने की योजना के तहत उन्हें वहां से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया था, जिसके बाद अब पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश से उच्च सदन भेजने का फैसला किया है। यहाँ एक सीट केन्द्रीय मंत्री एल मुरुगन से इस्तीफा लेकर खाली कराई गयी है, ताकि बंदे को भेजा जा सके।

इस अरक्षणीय का बचाव करने के लिए अनेक बहाने बनाए जा रहे हैं, कुतर्क उछाले जा रहे हैं। कुछ ‘विद्वान’ बताते हैं कि पंजाब में होने वाले विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है। इस तरह वे यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे हरदीप पुरी पंजाब के अवाम का बड़ा चहेता हो – जो वह नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि एप्सटीन फाइल के हजारों पन्ने अभी और खुलने हैं – उनमे पुरी से बड़े वालों के नाम भी आ सकते हैं। बीच-बीच में मोदी की राजनीति खत्म करने की धमकी देकर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प इसका इशारा करता भी रहता है। ऐसे में यदि उस फाइल के नाम पर एक इस्तीफा हुआ, तो वह एक उदाहरण बन जाएगा। कुछ लोग मानते हैं कि तेल कूटनीति के लिए पुरी के जरिये भारत के मौजूदा हुक्मरानों को संदेश दिया गया है कि पिक्चर ही नहीं, हजारों पिक्चर्स अभी बाकी हैं।

वजहें जो रही हों – राजनीति का इतने नीचे चले जाना सचमुच में शर्म और लज्जा की बात है। मध्यप्रदेश के लिए तो और भी अधिक, क्योंकि उसे लोकसभा में ‘साध्वी’ मिलती हैं और राज्यसभा में हरदीप जैसे ‘साधू’!!

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button