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सांस्कृतिक विरासत दर्शन यात्रा सम्पन्न

रामघाट पर बरसा भजनामृत, सराबोर हुए श्रद्धालु

लखनऊ। भारतीय सांस्कृतिक विरासत दर्शन के उद्देश्य से लोक संस्कृति शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय चित्रकूट यात्रा का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान रामघाट स्थित गहोई वैश्य भवन में भजन संध्या के साथ श्रद्धालुओं ने हनुमान धारा, सीता रसोई, सती अनुसूया आश्रम, रामघाट, कामदगिरि पर्वत, गुप्त गोदावरी, भरत मिलाप मंदिर एवं स्फटिक शिला आदि का दर्शन-पूजन किया।

यात्रा समन्वयक अर्चना गुप्ता ने बताया कि मंदाकिनी तट स्थित रामघाट पर संध्या आरती के उपरांत आयोजित भजनामृत वर्षा में प्रतिभागियों ने भजनों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। शुरुआत डॉ. रश्मि उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना सबसे पहले पूजा तोहार हो गौरी के ललना से हुई। इसके पश्चात उन्होंने चित्रकूट के घाट घाट पर शबरी देखे बाट भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। अरुणा उपाध्याय ने बधईया बाजे आंगने मा रामजी झूले पालने मा, शिखा श्रीवास्तव ने कौशल्या के जनमे ललनवा अवध मा बाजे बधैया हो तथा अर्चना गुप्ता ने ए हो रघुरइया जतनिया बताई द की प्रस्तुति दी। अलका चतुर्वेदी ने अवधपुर बाजे आज बधैया, प्रतिमा मिश्रा ने भज रघुवर श्याम युगल चरना एवं विवेक श्रीवास्तव ने मंगल मूरत राम दुलारे भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर दिया। सीमा अग्रवाल ने कीर्तन में सब आने वाले अपना नाम लिखाना के माध्यम से सहभागिता का भाव जगाया, जबकि देवेश्वरी पंवार ने प्रभु जी तुम चंदन हम पानी की मधुर प्रस्तुति दी। अर्पित श्रीवास्तव ने हारमोनियम तथा रेनू दुबे ने ढोलक पर संगत की।

संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने बताया कि लोक संस्कृति शोध संस्थान निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और आध्यात्मिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यात्रा में अर्चना गुप्ता, डॉ. सुधा द्विवेदी, डॉ. रश्मि उपाध्याय, प्रेमलता राय, इन्दु जायसवाल, विनीता शुक्ला, डॉ. राजकुमार शुक्ला, रेनू दुबे, अरुणा उपाध्याय, देवेश्वरी पंवार, अलका चतुर्वेदी, सीमा अग्रवाल, शैलजा श्रीवास्तव, नीलम श्रीवास्तव, विनीता अग्रवाल, शिखा राज, प्रतिमा मिश्रा, शिखा श्रीवास्तव, विवेक श्रीवास्तव, अमिता मौर्या, संगम मौर्या, नीरु वर्मा, सुनीता सोनी, मधु तिवारी, अर्पित श्रीवास्तव तथा डॉ. एस.के. गोपाल की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

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