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विराट स्वरूप धर श्रीकृष्ण ने तोड़ा दुर्योधन का अहंकार – चैती महोत्सव का ग्यारहवां दिन

चैती महोत्सव का ग्यारहवां दिन

लखनऊ । ऐशबाग रामलीला मैदान में चल रहे चैती महोत्सव में रविवार को कृष्णलीला के मंच का आरंभ पांडवों के अज्ञातवास से आरंभ हुआ जहां मतस्य देश का सेनापति द्रौपदी से दुर्व्यवहार करता है जिसका बदला भीम कीचक का वध करके लेते हैं । अज्ञातवास के उपरांत जब पांडव अपने राज्य का अधिकार मांगते हैं तो लालची दुर्योधन उन्हे उनके अधिकारों को नही लौटाता है । जिसके फलस्वरूप महाभारत युद्ध की घोषणा हो जाती है । युद्ध से पूर्व दुर्योधन द्वारा अनुरोध किए जाने पर श्रीकृष्ण अपनी चतुरंगिणी सेना दुर्योधन को दे देते हैं ।

महाभारत युद्ध से पूर्व श्रीकृष्ण शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं , जहाँ पांडवों के हक की बात करने पर दुर्योधन द्वारा श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का अहंकारपूर्ण प्रयास किया । इस घटना के बाद श्रीकृष्ण ने हस्तिनापुर की सभा में अपना दिव्य विश्वरूप प्रकट किया, जिसे देख दुर्योधन और वहाँ उपस्थित सभी दरबारी भयभीत हो उठते हैं । श्रीकृष्ण द्वारा हस्तिनापुर दरबार में की गई विराट स्वरूप दर्शन की लीला के साथ ही ग्यारहवें दिन की लीला का समापन किया गया ।

रविवार को चैती महोत्सव के मंच का आरंभ आरती शुक्ला डांस ग्रुप द्वारा गणेश वंदना पर नृत्य के साथ किया गया जिसके बाद शिव भजन पर नृत्य व नृत्य नाटिका महाभारत के बाद समूह नृत्य ‘नरसिम्हा’ , लोक नृत्य ‘कैसे खेलन जइबू सावन में’, रसिया को नार बनाओ रे व खाटू श्याम भजन पर समूह नृत्य प्रस्तुत किए गए ।
दूसरी प्रस्तुति सृजन डांस परफार्मिंग आर्टस द्वारा भजन ‘राधे राधे बोलो गे तो आएंगे बिहारी, राधाकृष्ण महारास, रंग बरसे रे, आज राधा को श्याम याद आ गया’ को कलाकारों द्वारा नृत्य के भाव से सजाया गया जिसे दर्शकों ने अपनी तालियों से सराहा ।

ऐशबाग रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया की सोमवार को चैती महोत्सव 2026 के समापन दिवस पर कृष्णलीला में बर्बरीक कथा, अर्जुन को गीता का उपदेश व श्रीकृष्ण के अनेक स्वरूपों के साथ फूलों की होली की लीलाओं के उपरांत प्रसाद वितरण कर इस 12 दिवसीय कार्यक्रम का समापन उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा ।

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