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कैंसर जैसी चुनौतियों के बीच एक नई उम्मीद

यूनानी चिकित्सा का आधुनिक स्वरूप

लखनऊ। चिकित्सा जगत में  इंटीग्रेटेड मेडिसिन एकीकृत चिकित्सा की चर्चा जोरों पर है। हाल ही में लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर (KGMU) में आयोजित यूनानी दिवस समारोह 2026 ने यह सिद्ध कर दिया कि प्राचीन यूनानी पद्धति अब केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है।

यह सम्मेलन महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रख्यात चिकित्सक हकीम अजमल खान की स्मृति में आयोजित किया गया। इस वर्ष का मुख्य विषय Innovations in Unani Medicine for Integrated Palliative Care अपने आप में एक बड़े बदलाव का संकेत है। पेलिएटिव केयर (उपशामक देखभाल) में यूनानी दवाओं की भूमिका विशेष रूप से उन मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रही है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कैंसर के उपचार में यूनानी और आधुनिक चिकित्सा का संगम रहा। पुणे के डॉ. मस्तान अकबर शेख ने Integrative Oncology पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे एलोपैथी के साथ यूनानी दवाओं का संयोजन कैंसर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विभोर महेंदू और प्रो. सत्यवती देसवाल (RML) के शोध पत्रों ने यह स्पष्ट किया कि Targeted Therapy और Precision Radionuclide Therapy जैसे आधुनिक उपचारों के साथ यूनानी अनुसंधान को जोड़ना समय की मांग है। यह तालमेल न केवल इलाज के दुष्प्रभावों (Side-effects) को कम करेगा, बल्कि रिकवरी की दर को भी बढ़ाएगा।

किसी भी चिकित्सा पद्धति के विकास के लिए सरकारी संरक्षण अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज मंत्री श्री दानिश आजाद अंसारी ने इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। प्रदेश में नए यूनानी मेडिकल कॉलेज और डिस्पेंसरी खोलने की घोषणा इस प्राचीन विधा को मुख्यधारा में लाने का एक साहसिक कदम है। क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा का समर्थन भी इस बात की पुष्टि करता है कि विधायी स्तर पर आयुष पद्धतियों को प्राथमिकता दी जा रही है।

नेशनल यूनानी डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (NUDWA) के अध्यक्ष डॉ. एस मुईद अहमद द्वारा उठाई गई मांगें, जैसे यूनानी AIIMS की स्थापना, रिक्त पदों पर नियुक्तियां और आपातकालीन स्थितियों में IV फ्लूइड थेरेपी के प्रयोग का अधिकार इस क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों को दर्शाती हैं। बरेली कॉलेज का नाम हकीम अजमल खान के नाम पर रखने का प्रस्ताव न केवल प्रतीकात्मक सम्मान है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को यूनानी चिकित्सा के स्वर्णिम इतिहास से जोड़ने का प्रयास भी है।

लखनऊ में हुआ यह वैज्ञानिक सम्मेलन यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। जब आधुनिक विशेषज्ञ और यूनानी हकीम एक मंच पर आकर शोध साझा करते हैं, तो लाभ अंतत, मानवता का ही होता है। जैसा कि आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सलमान खालिद और सचिव डॉ. नाज़िर अब्बास ने रेखांकित किया, वैज्ञानिक स्वरूप को मजबूत करके ही यूनानी चिकित्सा को वैश्विक पटल पर स्थापित किया जा सकता है।

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