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ASSOCHAM और CAG ने औद्योगिक GST मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने पर जोर

लखनऊ : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय, लखनऊ के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण हितधारक बैठक में, ASSOCHAM उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट काउंसिल ने GST व्यवस्था के अंतर्गत छोटे व्यवसायों, MSME और कारीगरों को आ रही ज़मीनी स्तर की गंभीर अनुपालन चुनौतियों को प्रस्तुत किया।

ASSOCHAM उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट काउंसिल के को-चेयरमैन  हसन याक़ूब के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने CAG के प्रधान निदेशक (वाणिज्य)  संजय कुमार से मुलाकात की। यह बैठक GST में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस से जुड़ी CAG की राष्ट्रव्यापी ऑडिट प्रक्रिया के तहत आयोजित की गई।

CAG की ओर से बैठक में शामिल अधिकारी
1. श्री संजय कुमार, प्रधान निदेशक (वाणिज्य), CAG
2. श्री टी मनोहर राव, उप निदेशक, CAG (INDT प्रशासन)

अनुपालन का भय, छोटे व्यवसायों की बड़ी दुविधा

हसन याक़ूब ने कहा कि दस्तावेज़ी बोझ और जटिल अनुपालन प्रक्रियाएँ आज भी छोटे व्यापारियों में चिंता और भय पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कई छोटे व्यापारी और कारीगर जटिलताओं, दंड और भारी कागजी कार्यवाही के डर से GST पंजीकरण से बचते हैं। युवा पीढ़ी डिजिटल अनुपालन को अपनाने के लिए तैयार है, लेकिन वरिष्ठ व्यापारियों की आशंकाएँ व्यवसाय के औपचारिकीकरण और विस्तार में बाधा बन रही हैं।

मुख्य मुद्दे जो सामने रखे गए

इनपुट टैक्स क्रेडिट में देरी
MSME को सप्लायर अनुपालन पर निर्भरता के कारण 6 से 8 महीने तक ITC अटकने की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे कार्यशील पूंजी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। एंस्की वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री शेख मोहम्मद तारिक ने कहा कि कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे निर्माताओं के लिए यह गंभीर नकदी संकट पैदा करता है।

दंड से राहत की आवश्यकता
प्रतिनिधिमंडल ने समय समय पर एमनेस्टी योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। ₹50 प्रतिदिन की लेट फीस तकनीकी समस्याओं या वास्तविक कठिनाइयों का सामना कर रहे व्यवसायों पर अत्यधिक बोझ डाल देती है।

सप्लायर की चूक का दुष्प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन के बावजूद, सप्लायर की गलती के कारण खरीदारों को ITC रिवर्सल झेलना पड़ता है। श्री ऋषभ ने कहा कि कोई निर्माता अपने 50 सप्लायरों की GST जमा स्थिति पर निगरानी नहीं रख सकता। डिफॉल्टर से वसूली की जिम्मेदारी कर विभाग की होनी चाहिए, न कि ईमानदार खरीदार को दंडित किया जाना चाहिए।

अंतरराज्यीय व्यापार में बाधाएँ
कई कारीगर GST पंजीकरण के भय से अंतरराज्यीय व्यापार से दूर रहते हैं, जिससे उनके अवसर सीमित हो जाते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कंपोज़ीशन स्कीम की सीमा ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ करने और सरल प्रक्रियाओं के साथ B2B लेनदेन की अनुमति देने का सुझाव दिया।

अनुपालन बोझ
एकाधिक रिटर्न फाइलिंग और जटिल रीकंसिलिएशन प्रक्रियाएँ छोटे व्यवसायों पर असमान दबाव डालती हैं। एकल, ऑटो-पॉप्युलेटेड रिटर्न प्रणाली लागू करने की मांग रखी गई।

GST 2.0 के लिए सुझाव

ASSOCHAM ने GST 2.0 के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें ₹10 करोड़ से कम टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए समय सीमा में लचीलापन, समयबद्ध ITC निपटान एवं प्रोविजनल क्रेडिट व्यवस्था, सप्लायर डिफॉल्ट की स्थिति में खरीदारों की सुरक्षा, एकीकृत मासिक रिटर्न प्रणाली, कंपोज़ीशन स्कीम की सीमा में वृद्धि, स्टार्टअप्स के लिए आसान एग्ज़िट प्रक्रिया, फाइनेंशियल क्रेडिट नोट्स पर स्पष्टता तथा टेंडर मूल्यांकन में करों की पारदर्शी गणना शामिल है।

सहयोगात्मक सुधार की दिशा में कदम

श्री हसन याक़ूब ने कहा कि यह संवाद GST की सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है। GST के अंतर्गत पंजीकृत 3.16 करोड़ MSME भारत के GDP में लगभग 30 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान देते हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए GST को सही ढंग से लागू करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में GST असेसी की संख्या 21 लाख तक पहुँचने की ओर है और राज्य में अपार संभावनाएँ हैं। GST अनुपालन को सरल बनाकर उद्यमशील ऊर्जा को मुक्त किया जा सकता है और उत्तर प्रदेश को विनिर्माण एवं निवेश का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है।

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