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सोनी सब के कलाकारों ने बताए अपने वॉलेट में संजोकर रखे गए सबसे भावनात्मक सामान के किस्से

मुंबई : हमारा वॉलेट अक्सर रोजमर्रा की ज़रूरतों की चीजें संभालकर रखता है, लेकिन कई लोगों के लिए इसमें कुछ और भी ज़्यादा अहम होता है — नितांत निजी संपत्ति। चाहे वो धुंधली होती कोई तस्वीर हो, जल्दी-जल्दी लिखी गई कोई पर्ची, लकी चार्म हो या कोई प्यारी सी यादगार चीज, ये छोटी-छोटी चीज़ें हमें हर दिन उन लोगों, पलों और मूल्यों की याद दिलाती हैं जो हमारी ज़िंदगी में सच में मायने रखते हैं। ऐसे ही दिल छू लेने वाले, बेहद निजी खुलासे में सोनी सब के कलाकार रजत वर्मा, श्रेय मराड़िया और गौरव चोपड़ा ने बताया कि वे अपने वॉलेट में कौन-सा भावनात्मक सामान संभालकर रखते हैं। प्यार के तोहफों और हाथ से लिखी दुआओं से लेकर ऐसे छोटे-छोटे खज़ाने तक, जो उन्हें लम्बे वर्कडे में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं — हर कहानी एक गहरा निजी रिश्ता और उन भावनाओं की झलक दिखाती है, जो दर्शकों के पसंदीदा इन किरदारों के पीछे छिपी हैं।

‘इत्ती सी ख़ुशी’ में विराट वर्मा की भूमिका निभा रहे रजत वर्मा बताते हैं, “मेरे वॉलेट में हमेशा मेरी मां की एक छोटी-सी तस्वीर रहती है। बचपन से लेकर अब तक, जब मैं अपने सपनों के पीछे भाग रहा था, वो मेरी सबसे बड़ी सपोर्टर रही हैं। वो तस्वीर मुझे हर दिन ये याद दिलाती है कि जब मैं खुद पर शक करता था, तब भी उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था। मेरे दोस्त मुझे अक्सर ‘मम्माज़ बॉय’ कहते हैं, और मैं ये टैग बड़े गर्व से स्वीकार करता हूं। मेरे लिए ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, बल्कि बेशर्त प्यार और अपने सपनों का पीछा करने की हिम्मत की याद दिलाने वाली निशानी है।”

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में ऋषभ का किरदार निभा रहे श्रेय मराड़िया बताते हैं, “मैं अपने वॉलेट में एक पुरानी, बेरंग हो चुकी बस की टिकट रखता हूं, जो मैंने सालों पहले पापा के साथ की गई एक यात्रा के दौरान संभालकर रखी थी। वो बहुत साधारण-सी चीज़ है, लेकिन जैसे ही उसे देखता हूं, उन लम्बी बातचीतों की याद आ जाती है, जो हमने बस में बैठकर की थीं — बस हम दोनों, और खिड़की के बाहर भागती दुनिया। जब भी वो टिकट नज़र आती है, मुझे याद दिलाती है कि मैं कहां से आया हूं और पापा ने मुझे क्या मूल्य सिखाए। ये मेरे सफर का एक छोटा-सा हिस्सा है, जो मुझे ज़मीन से जोड़े रखता है, चाहे मैं कितनी भी दूर क्यों न चला जाऊं।”

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में प्रोफेसर राजवीर शास्त्री का किरदार निभा रहे गौरव चोपड़ा कहते हैं, “मैं अपने वॉलेट में कुछ पंक्तियां रखता हूं, जो मेरे पिताजी ने खुद लिखी हुई हैं। जब भी मैं किसी चुनौती या किसी बड़े फैसले के सामने खड़ा होता हूं, ये पंक्तियां मुझे साफ़ सोचने की ताकत और हिम्मत देती हैं। ये मेरे लिए उनके प्यार, उनकी समझदारी और उनसे जुड़ी यादों को अपने साथ हर वक्त लेकर चलने का एक तरीका है।”

 

 

 

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