कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ मरण और भरत विलाप का हुआ भावपूर्ण मंचन
सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कॉलोनी रामलीला, दूसरा दिन

लखनऊ । सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कॉलोनी में चल रही रामलीला के 34वें मंचन के दूसरे दिन शनिवार को कैकेयी-मंथरा संवाद, कैकेयी-दशरथ संवाद, दशरथ मरण और चित्रकूट में भरत मिलाप के दृश्यों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को रामायण के भावुक प्रसंगों से रूबरू कराया। मंचन की शुरुआत श्रीराम एवं लक्ष्मण जी की आरती के साथ हुई। इसके बाद कैकेयी-मंथरा संवाद का मंचन किया गया, जिसमें मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी के मन में राम के राज्याभिषेक को लेकर असंतोष पैदा होता है। कैकेयी के कोप भवन में जाने पर राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं। वहां कैकेयी को दुखी अवस्था में देखकर राजा दशरथ पूछते हैं, ‘‘हे रानी, यह कैसा हाल बना रखा है? यहां क्यों लेटी हो, क्या हो गया?’’ कलाकारों ने राजा दशरथ की चिंता और कैकेयी के मन में चल रहे द्वंद्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
राम के वनवास और पुत्र वियोग से व्यथित राजा दशरथ के मरण के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, ननिहाल से लौटने पर भरत को जब पिता की मृत्यु, बड़े भाई श्रीराम के वनवास और माता कैकेयी द्वारा उनके लिए राजगद्दी मांगने की जानकारी मिलती है, तो वह विचलित हो उठते हैं। भरत अपनी माता के निर्णय का विरोध करते हुए कहते हैं, ‘‘ज्येष्ठ भ्राता के होते छोटा न राज कर सकता है।’’ इसके बाद वह श्रीराम को वापस अयोध्या लाने और उन्हें राजगद्दी स्वीकार करने के लिए मनाने के उद्देश्य से वन की ओर प्रस्थान करते हैं। भरत के त्याग, भ्रातृ प्रेम और मर्यादा को दर्शाते इस प्रसंग ने रामलीला में उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला के माध्यम से कलाकारों ने पारिवारिक संबंधों, त्याग, कर्तव्य और भ्रातृ प्रेम के आदर्शों को जीवंत किया। इस अवसर पर रवि रंजन सक्सेना, वीरेंद्र पाठक, उमाशंकर राठौर, हरिहर पाण्डेय, सुरेश तिवारी, जितेंद्र मिश्रा, शांतिस्वरूप शुक्ला, संजीव, रामानुज, अतुल मिश्रा सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



