एलडीए का प्रवर्तन ड्रामा, जब विकास भी मुस्कुराने लगे!
कागज़ी उस्ताद और शातिर खिलाड़ी, इंजीनियरों की ड्रीम टीम ऑन ड्यूटी!

मोहम्मद सैफ
लखनऊ : लखनऊ विकास प्राधिकरण आजकल ख़बरों में नहीं, बल्कि कारनामों में है! अगर आप सोचते हैं कि अवैध निर्माण रोकने के लिए जीपीएस कैमरे और वीडियोग्राफी जैसे हाई-टेक इंतज़ाम हो रहे हैं, तो रुकिए! आप प्राधिकरण के प्रवर्तन की असल कहानी नहीं जानते।
एलडीए ने बड़े फ़ख्र से दावा किया कि अब कोई अवैध ईंट रखी नहीं जाएगी। मगर असलियत तो यह है कि यह वीडियोग्राफी महज़ एक शोपीस बनकर रह गई है, क्योंकि इनके अपने साठगाँठी इंजीनियरों और सहायक अभियंताओं के आगे ये कैमरे भी शरमाकर फ़ेल हो जाते हैं।
इस विकास-विरोधी मुहिम को और भी मज़ेदार बनाने के लिए, हमारे पास है एक नई ड्रीम टीम कानपुर से आए सहायक अभियंता ये कागज़ी मामलों के उस्ताद जो प्रवर्तन ज़ोन-7 में तैनात हैं। शायद इनका कागज़ को हवा में उड़ाने का हुनर ही इन्हें ख़ास बनाता है।
विवेक पटेल और सहायक अभियंता ये दो पुराने खिलाड़ी हैं। इनकी जुगलबंदी ने मिलकर ज़ोन में लूट का इतना बड़ा मेला लगा दिया है कि पूछिए मत! जोन-7 धड़ल्ले से लूट चल रही है, और प्राधिकरण के हमारे माननीय उपाध्यक्ष महोदय बस आराम से बैठे यह मनोरंजक तमाशा देख रहे हैं। शायद वह भी सोच रहे होंगे, क्या अद्भुत विकास हो रहा है मेरे शहर का!
जानकारी के अनुसार इन इंजीनियरों का जल्द ही तबादला होने वाला है। यानी अब लूट ज़ोन-7 से शिफ्ट होकर अन्य ज़ोनों में शुरू होगी! इनकी कार्यशैली में बदलाव की उम्मीद करना तो ऐसा है, जैसे बाँझ के खेत में मोती की फसल देखना।
इनकी फिलॉसफी बिल्कुल साफ़ है, ट्रांसफर तो बहाना है, असली मक़सद तो रुपया कमाना है। जोन-7 के अधिकारी तानाशाही रवैये के साथ जनता की शिकायतों को कूड़ेदान में डाल देते हैं।
लखनऊ की तंग गलियों में सीना ताने खड़ी इन व्यावसायिक इमारतों को देखिए, ये इनके सोनरी इतिहास की गवाह हैं। बाज़ार खाला थाने के पीछे अभियंता राहुल ने नोटिस तो दी, मगर उसके बाद की कार्रवाई छुट्टी पर चली गई। शायद कार्रवाई को लगा कि काम इतना अच्छा चल रहा है तो बीच में टोकना क्या!
नादान महल रोड वाजपेयी पुरी यहाँ तो कमाल ही हो गया! नोटिस को फ़टाफ़ट निस्तारित किया गया, और अनधिकृत निर्माण देखते ही देखते एक भव्य इमारत में बदल गया। वाजपेयी पुरी वाले की दुकान तोड़कर रात भर जो खुदाई चल रही है, उसे देखकर लगता है, हमारे अभियंतागण निर्माण के संरक्षण दाता से कम नहीं!
और उस ₹7 लाख की रिश्वत का खुला आरोप, जो हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जितेंद्र नारायण सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल पर विवेक पटेल पर लगाया था, वह तो बस एक छोटी-सी टिप है!
जब मिलीभगत से सड़कों की ज़मीन पर भी निर्माण हो जाए, और शिकायत का निस्तारण भी ग़लत तरीक़े से कर दिया जाए, तो हमें इस विकास प्राधिकरण की महानता को सलाम करना चाहिए।क्योंकि अगला लूट का ज़ोन कौन-सा होगा, यह तो तबादले की सूची आने पर ही पता चलेगा! इनकी जांच तो आईडी द्वारा कराई जानी चाहिए ताकि सब कुछ खुलकर सामने आ सके।
प्रवर्तन जोन-7 की हाई-टेक नौटंकी, कैमरे भी फेल, जब अवय अभियन्त हुए मालामाल!
₹7 लाख की रिश्वत और भव्य इमारतें, एलडीए के भ्रष्टाचार की नई मास्टरपीस!
जब कार्रवाई छुट्टी पर चली गई, अवैध निर्माणों के संरक्षण दाता कौन?



