ऊर्जा मंत्री चला रहे आधुनिकता की ट्रेन, पर राजाजीपुरम में दौड़ी वसूली एक्सप्रेस
बिजली का तार नहीं, साहब की जेब का तार जोड़ो, तभी मिलेगी रोशनी!

मोहम्मद सैफ
लखनऊ। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा जी जिस लगन से बिजली विभाग को आधुनिकता की ट्रेन पर सवार करने का प्रयास कर रहे हैं, उस प्रयास को राजधानी के राजाजीपुरम चौराहे पर स्थित 33/11 के-वी सबस्टेशन के बाबू और इंजीनियर महोदय बड़े प्रेम से पटरी से उतार रहे हैं। ज़ाहिर है, मंत्री जी की आधुनिकता यहाँ आकर बस वसूली के नए-नए ईजाद तरीकों तक ही सीमित रह गई है।
एक सीधे-साधे उपभोक्ता ने सोचा कि जब प्रदेश में बदलाव आ गया है, तो ईमानदारी का परचम लहराएगा। बेचारे ने नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन कर दिया। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उत्तर प्रदेश में ईमानदारी अभी भी एक निर्माणाधीन बिल्डिंग है!
काम शुरू हुआ सुपरवाइजर महेश्वर यादव से, जिन्होंने 10 दिन तक उपभोक्ता को विभाग में ही नचाया, फिर मामला अंशुमान पटेल को सौंप दिया। पटेल जी ने उपभोक्ता से बड़ी बेबाकी से कहा कि वह सिस्टम के बाहर से आए हैं। अगर सिस्टम शायद दलाल रूपी पुल से आते, तो अब तक काम हो जाता।
जब पत्रकार जो स्वयं उपभोक्ता भी थे, ने इस पर आपत्ति जताई, तो इंजीनियर अशोक की देखरेख में फॉर्म यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि मकान फिनिश होने के बावजूद बिजली के स्विच नहीं लगे हैं, मानो स्विच लगाना ही एकमात्र और सबसे बड़ा अपराध हो।
जिस उपभोक्ता को वायरिंग के बहाने कनेक्शन से वंचित किया गया, ठीक उसी क्षेत्र में अवैध बिल्डिंग कनेक्शन मिला, बड़ी सरलता से! सीलिंग का आदेश प्राप्त बिल्डिंग, कनेक्शन मिला, बड़ी तत्परता से! तीन शेड और बिना प्लास्टिक वाले मकान में कनेक्शन मिला, बिना किसी आपत्ति के! ऐसा लगता है कि बिजली विभाग के दफ्तर में अवैध निर्माण की फाइल पर तत्काल कार्रवाई की मुहर पहले से लगी होती है, जबकि साधारण उपभोक्ता की फाइल पर ठंडे बस्ते में डालो का ईमानदार आदेश होता है।
अधिकारियों की महानता देखिए। अभियंता अशोक इतने व्यस्त हैं कि उपभोक्ता का फोन उठाना उनके लिए विकास की राह में एक बड़ी बाधा बन जाता है।
इन महोदयों का व्यापार धमकी के दम पर खूब धड़ल्ले से चल रहा है। इनका सीधा संदेश है, अगर तुमने कहीं शिकायत की, तो हम तुम्हारे मीटर में ऐसी चीज़ लगा देंगे कि तुम्हें अपने जलाने से ज़्यादा बिल जमा करना पड़ेगा।
यह कार्यशैली सीधे तौर पर माननीय मुख्यमंत्री जी के जीरो टॉलरेंस की नीति का मजाक उड़ा रही है। ये किसी और को नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री को सीधे चूना लगा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार बिल्डरों से मोटी रकम लेकर धड़ल्ले से मीटर देने वाले और अपने वेतन से कई गुना ज़्यादा संपत्ति बनाने वाले ये इंजीनियर मौज काट रहे हैं।
फिलहाल उपभोक्ता की मांग है कि इस वसूली एक्सप्रेस की जाँच विभाग नहीं, बल्कि ईडी प्रवर्तन निदेशालय करे, ताकि इनकी अवैध संपत्तियों का हिसाब हो सके और यह पता चल सके कि वाकई इनकी पहुँच ऊपर तक है, या यह सब सिर्फ़ धोखा है।
जनता को संदेश, अगर आप नियम-कानून से चल रहे हैं, तो रुकिए! पहले अपने घर की वायरिंग में दलाल-कनेक्शन का तार डलवाइए, अन्यथा आपको इंजीनियर साहब का फोन तो क्या, दर्शन भी नहीं होंगे!



