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गरीब छात्रों को पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए खून बेचने पर मजबूर होना भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा : राजेंद्र पाल गौतम

नई दिल्ली/लखनऊ । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी  राजेंद्र पाल गौतम पूर्व मंत्री ने उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह को ज्ञापन सौंपकर प्रयागराज सहित प्रदेश के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में विद्यार्थियों से कथित तौर पर खून खरीदने-बेचने के अवैध कारोबार की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

राजेंद्र पाल गौतम ने सौंपे गये ज्ञापन में एक समाचारपत्र की 25 से 27 अक्टूबर 2026 के बीच प्रकाशित खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि प्रयागराज में नीट, एसएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र कोचिंग फीस, हॉस्टल और भोजन का खर्च उठाने के लिए अपना खून बेचने जैसी खतरनाक परिस्थितियों में पहुंच गए हैं। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सरकार की युवा हितों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की सालाना फीस लगभग 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक है। इसके अलावा हॉस्टल, मेस और अध्ययन सामग्री का खर्च भी विद्यार्थियों पर भारी पड़ता है। ग्रामीण और किसान परिवारों से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए इन खर्चों को उठाना बेहद मुश्किल हो रहा है। शिक्षा प्राप्त करने का सपना लेकर प्रयागराज आने वाले इन युवाओं को आर्थिक तंगी के कारण अपने स्वास्थ्य से समझौता करना पड़ रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपे गये ज्ञापन में इस पूरे मामले के एक और चिंताजनक पहलू का उल्लेख किया गया है, जिसमें रिपोर्ट के अनुसार ब्लड बैंकों के आसपास सक्रिय एजेंट और दलाल विद्यार्थियों को रक्त बेचने के लिए प्रेरित करते हैं। मरीजों के परिजनों से एक यूनिट रक्त के बदले लगभग 8 हजार रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है, जबकि विद्यार्थियों को तमाम कटौतियों के बाद महज 3,500 से 4,000 रुपये ही मिलते हैं। आर्थिक मजबूरी में कुछ विद्यार्थियों द्वारा महीने में दो से चार बार तक रक्तदान करने के मामले भी सामने आए हैं। बार-बार रक्तदान करना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

श्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है कि जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें और भविष्य संवारने के अवसर होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें अपनी पढ़ाई और पेट पालने के लिए खून बेचने की नौबत आ रही है। आखिर प्रदेश में ऐसी कौन सी व्यवस्था है, जहां गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार तो है, लेकिन शिक्षा हासिल करने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं?

उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ विद्यार्थियों की आर्थिक मजबूरी का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती असमानता, गरीब और वंचित वर्गों के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय तथा सरकारी सहायता व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति, सस्ती आवासीय सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराए, न कि उन्हें इस तरह असुरक्षित परिस्थितियों में जीने के लिए छोड़ दे।

श्री गौतम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देशित कर प्रयागराज सहित प्रदेश के सभी प्रमुख कोचिंग केंद्रों में इस प्रकरण की विशेष जांच कराई जाए। रक्त के अवैध कारोबार में संलिप्त एजेंटों, दलालों और इसमें भूमिका पाए जाने वाले ब्लड बैंकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सरकारी कोचिंग योजनाओं का विस्तार, विशेष छात्रवृत्ति, किफायती छात्रावास और अन्य आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी विद्यार्थी को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम में न डालना पड़े।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के युवाओं के शिक्षा एवं सम्मानजनक भविष्य के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी। प्रदेश सरकार को इस गंभीर मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए और प्रभावित विद्यार्थियों को राहत पहुंचानी चाहिए।

श्री गौतम ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा किसी की आर्थिक हैसियत की मोहताज नहीं होनी चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि गरीब के बच्चे को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिले, न कि उसे पढ़ाई की कीमत अपने खून से चुकानी पड़े।

प्रतिनिधि मंडल में दिल्ली के ह्यूमन राइट्स एंड लॉ डिपार्मेंट के अध्यक्ष  सुनील कुमार सहित दर्जनों की संख्या में अधिवक्ता और कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

 

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