हे मां मेडिको’ का मायाजाल, नकली दवाओं का सौदागर रिश्वत देकर भी रंगे हाथों धरा गया

रिपोर्ट – मोहम्मद सैफ
लखनऊ : लखनऊ की सैर करें तो जरा आगरा की ओर भी नजर डालिए, जहां यूपी एसटीएफ ने एक ऐसा मेडिकल मसीहा पकड़ा है, जिसने हे मां के नाम पर नकली दवाओं का धंधा खड़ा कर रखा था। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमांशु अग्रवाल की, जो ‘हे मां मेडिको एजेंसी’ के मालिक हैं। लेकिन मां की कृपा इन पर कम पड़ी, और कानून की लाठी ने इन्हें सीधे हवालात का रास्ता दिखा दिया।
बात उस दिन की है जब यूपी एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने हिमांशु के आगरा स्थित गोदाम पर छापा मारा। अब छापा मारा तो गोदाम में दवाएं ऐसी मिलीं कि लगे जैसे कोई मेडिकल स्टोर नहीं, बल्कि नकली दवाओं का पूरा कारखाना चल रहा हो। ज़ायडस, ग्लेनमार्क, सन फार्मा, बड़े-बड़े ब्रांड्स की नकली दवाएं, जिनकी कीमत ₹3.32 करोड़ आंकी गई। ये दवाएं देखकर तो एसटीएफ की आंखें भी चमक उठीं, लेकिन हैरानी से, न कि लालच से।

अब कहानी में ट्विस्ट आता है। जब एसटीएफ ने हिमांशु का कॉलर पकड़ा, तो जनाब ने सोचा कि पैसों की चमक से कानून की आंखों में धूल झोंक देंगे। बिल्कुल बॉलीवुड स्टाइल में, जेब से ₹1 करोड़ की रिश्वत का ऑफर ठोक दिया। मानो कह रहे हों, लो भैया, ये नोटों का बंडल रखो, और हमें चुपचाप निकल जाने दो। लेकिन भई, ये यूपी एसटीएफ है, कोई फिल्मी सेट नहीं, जहां स्क्रिप्ट पलट जाए। इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा और असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर नरेश मोहन दीपक ने जाल बिछाया, और हिमांशु को रिश्वत देते हुए रंगे हाथों धर लिया। इतने नोट थे कि गिनने के लिए मशीनें मंगवानी पड़ीं, सोचिए, क्या सीन रहा होगा!
हिमांशु का धंधा भी कम दिलचस्प नहीं। हे मां के नाम पर नकली दवाएं बेचकर ये जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे। लगता है, मां की कृपा के भरोसे ही ये सोच रहे थे कि सब कुछ चुपके-चुपके चलता रहेगा। लेकिन भूल गए कि मां की असली कृपा तो सच के साथ होती है, और यहां तो कानून की मां ने इनकी अच्छी खबर ली।
अब जांच का दायरा बढ़ रहा है। हवाला कनेक्शन की बात सामने आ रही है, और आयकर विभाग भी हिमांशु की अघोषित संपत्तियों की तलाश में जुट गया है। मेरठ कोर्ट ने इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है।



