मंधन 2025: राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक कूटनीति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 28-29 मार्च को

नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (FANS) द्वारा मंचन 2025 शीर्षक से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन 28-29 मार्च 2025 को सत्यकाम भवन, आर्ट्स फैकल्टी, दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित होगा।
इस वर्ष सम्मेलन का विषय “विकसित भारत दिव्य भारत @ 2047: राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक कूटनीति की दृष्टि” है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक तैयारी और सांस्कृतिक कूटनीति पर व्यापक विचार-विमर्श करना है, ताकि भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी (2047) की ओर अग्रसर होते हुए एक सुरक्षित और सशक्त राष्ट्र बने। इस प्रतिक्षित सम्मेलन में शिक्षा, शासन, मीडिया और सुरक्षा क्षेत्रों के दिग्गज विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। प्रमुख वक्ताओं में माननीय डॉ. इंद्रेश कुमार (राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य, आरएमएम एवं मार्गदर्शक, आरएसजेएम), श्री राम बहादुर राय (पद्म भूषण से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार एवं आईजीएनसीए के अध्यक्ष), और सरदार जसबीर सिंह (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, FANS) शामिल हैं। इनके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी सम्मेलन में विचार साझा करेंगे।
इस सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक विकास, भारत की वैश्विक भूमिका और सांस्कृतिक कूटनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसमें 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियां और उनके समाधान, विकसित भारत 2047 के लिए रणनीतिक क्षमता निर्माण, उभरते खतरों और रक्षा तैयारियों का भविष्य, वैश्विक भारत के लिए सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व, और राष्ट्र निर्माण में मीडिया और संचार की भूमिका जैसे विषयों को तामिल किया गया है। ये चर्चाएं भारत की सुरक्षा और रणनीतिक विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगी। मंचन 2025 का एक विशेष आकर्षण ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस निबंध लेखन पुरस्कार” है। यह आतक, आातकोत्तर और शोधार्थी छात्रों को भारत की रणनीतिक भविष्य दृष्टि पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस प्रतियोगिता के विजेताओं को उनकी नवाचारी सोच और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मेलन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) और मेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। यह निःशुल्क है और इसमें भाग लेने के लिए शिक्षाविदों, पत्रकारों, नीति-निर्माताओं और अन्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाता है।



