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संवैधानिक संकट पर भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में आप सरकार को बर्खास्त की राष्ट्रपति से  अपील की 

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में विधायकों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से दिल्ली में चल रहे संवैधानिक संकट में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। प्रतिनिधिमंडल ने आज राष्ट्रपति से भेंट की और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की कार्यप्रणाली पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें एक ज्ञापन दिया।

ज्ञापन में सर्वप्रथम दिल्ली की पंगु हो चुकी प्रशासनिक व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि आबकारी नीति घोटाले से संबंधित गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में सीएम केजरीवाल चार महीने से अधिक समय से जेल में हैं। जेल में बंद होने के बावजूद, केजरीवाल ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जिससे एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है और इसी कारण दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

ज्ञापन में AAP सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण संवैधानिक उल्लंघनों का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन न करना इसकी विफलता है। आयोग का गठन जो अप्रैल 2021 से लंबित है, न करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y का गंभीर उल्लंघन है, जिसके चलते दिल्ली के लिए वित्तीय योजनाओं और संसाधनों का आवंटन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (MCD) पर इसका व्यापक असर पड़ा है।

अपील में AAP सरकार के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का भी विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। करोड़ों रुपये का दिल्ली शराब घोटाला, जिसके कारण सीएम केजरीवाल समेत सरकार के शीर्ष मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई है, दिल्ली जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं के हालिया खुलासे, और 2021-22 और 2022-23 की इसकी बैलेंस शीट तैयार न होना जैसे मुद्दे इन समस्याओं की गंभीरता को दर्शाते हैं।

इसके अलावा, दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप है।

इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल विधायक मोहन सिंह बिष्ट, ओम प्रकाश शर्मा, अजय महावर, अभय वर्मा, अनिल वाजपेयी, जितेंद्र महाजन, करतार सिंह तंवर और दिल्ली के पूर्व मंत्री राजकुमार आनंद ने राष्ट्रपति मुर्मू से संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मौजूदा आप सरकार को बर्खास्त करने का आग्रह किया है।

राजधानी में शासन की बिगड़ती स्थिति के कारण दिल्ली के नागरिकों और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के बाधित होने की वजह से राष्ट्रपति से यह अपील की गई है। विपक्ष का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी में संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक मानदंडों के और अधिक पतन को रोकने के लिए राष्ट्रपति का तत्काल हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।

वैधानिक संकट पर, नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में आप सरकार को बर्खास्त करने के लिए राष्ट्रपति से की अपील*

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में विधायकों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से दिल्ली में चल रहे संवैधानिक संकट में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। प्रतिनिधिमंडल ने आज राष्ट्रपति से भेंट की और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की कार्यप्रणाली पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें एक ज्ञापन दिया।

ज्ञापन में सर्वप्रथम दिल्ली की पंगु हो चुकी प्रशासनिक व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि आबकारी नीति घोटाले से संबंधित गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में सीएम केजरीवाल चार महीने से अधिक समय से जेल में हैं। जेल में बंद होने के बावजूद, केजरीवाल ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जिससे एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है और इसी कारण दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है, और आवश्यक सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं, जिसका खामियाजा दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

ज्ञापन में AAP सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण संवैधानिक उल्लंघनों का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन न करना इसकी विफलता है। आयोग का गठन जो अप्रैल 2021 से लंबित है, न करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y का गंभीर उल्लंघन है, जिसके चलते दिल्ली के लिए वित्तीय योजनाओं और संसाधनों का आवंटन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (MCD) पर इसका व्यापक असर पड़ा है।
इसके अलावा दिल्ली सरकार CAG की 11 रिपोर्ट्स को विधानसभा के सदन पटल पर रखने में बार-बार विफल रही है। महत्वपूर्ण सूचनाओं को दबाने से न केवल पारदर्शिता बाधित होती है बल्कि सरकार के क्रिया कलापों और खर्च के ब्योरे की उचित जांच न हो पाने से इसके वित्तीय औचित्य पर भी गंभीर सवाल उठते हैं।

अपील में AAP सरकार के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का भी विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। करोड़ों रुपये का दिल्ली शराब घोटाला, जिसके कारण सीएम केजरीवाल समेत सरकार के शीर्ष मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई है, दिल्ली जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं के हालिया खुलासे, और 2021-22 और 2022-23 की इसकी बैलेंस शीट तैयार न होना जैसे मुद्दे इन समस्याओं की गंभीरता को दर्शाते हैं।
इसके अलावा, दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप है।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है और दिल्ली की जनता द्वारा दिए गए जनादेश को इसने धोखा दिया है। हमने राष्ट्रपति से इस सरकार को बर्खास्त करने और दिल्ली में संवैधानिक व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल विधायक मोहन सिंह बिष्ट, ओम प्रकाश शर्मा, अजय महावर, अभय वर्मा, अनिल वाजपेयी, जितेंद्र महाजन, करतार सिंह तंवर और दिल्ली के पूर्व मंत्री राजकुमार आनंद ने राष्ट्रपति मुर्मू से संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मौजूदा आप सरकार को बर्खास्त करने का आग्रह किया है।

राजधानी में शासन की बिगड़ती स्थिति के कारण दिल्ली के नागरिकों और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के बाधित होने की वजह से राष्ट्रपति से यह अपील की गई है। विपक्ष का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी में संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक मानदंडों के और अधिक पतन को रोकने के लिए राष्ट्रपति का तत्काल हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।

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