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राष्ट्र कवि चन्दर कुंवर बर्त्वाल की स्मृति में सम्मान समारोह आयोजित 

लखनऊ : हिन्दी दिवस के अवसर पर बुध बसंती मुनाल सभागार में हिंदी के सुप्रसिद्ध राष्ट्र कवि चन्दर कुंवर बर्त्वाल जी की पुण्यतिथि पर मुनालश्री विक्रम बिष्ट व कवि धन सिंह मेहता के संयुक्त तत्वावधान में सम्मान समारोह के साथ परिचर्चा व काब्यगोष्ठी आयोजित की गई , २८ वर्ष की अल्प आयु में ही बर्त्वाल जी का निधन हो गया था कवि मेहता जी का कहना हे कि 14 सितम्बर को उनकी पुण्यतिथि पर ही आज हिन्दीदिवस मनाया जाता हे , इस अवसर पर मुख्य अतिथि साहित्यकार गोबिंद पंत राजू व मुनालश्री विक्रम बिष्ट व कवि धन सिंह मेहता ने उभरते हुय कवी महेश चंद्र सकलानी को राष्ट्र कवी बर्त्वाल सम्मान से सम्मानित किया चन्द्र कुंवर बर्त्वाल जी का जन्म उत्तराखण्ड के चमोली जिले के ग्राम मालकोटी, पट्टी तल्ला नागपुर में 20 अगस्त 1919 में हुआ था। शिक्षा पौड़ी, देहरादून और इलाहाबाद में हुई। १९३९ में इन्होने इलाहाबाद से बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा १९४१ में एम०ए० में लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।

यहीं पर ये श्री सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी के सम्पर्क में आये। मुख्य अतिथि ने अपने विचार रखते हुए कहा प्रकृति के चितेरे कवि हिमवंत पुत्र बर्त्वाल जी अपनी मात्र २८ साल की जीवन यात्रा में हिन्दी साहित्य की अपूर्व सेवा कर अनन्त यात्रा पर प्रस्थान कर गये। 14 सितम्बर १९४७ में इनका आकस्मिक देहान्त हो गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि साहित्यकार गोबिंद पंत राजू व मुनालश्री विक्रम बिष्ट ,कवि धन सिंह मेहता की अध्यछता में कवी घनान्द पाण्डे, डॉ अपूर्वा अवस्थी , राधा बिष्ट व अन्य कवि ने कविता पाठ किया मुनाल के निदेशक विक्रम बिष्ट ने बताया कवि चंद्र कुमार जी ने देश के लिय कार्य किया और ये हमारा सौभाग्य था उत्तराखंड की पावन धरती देवभूमि गढ़वाल से जुड़े थे सभी अतिथियों ने भी बर्त्वाल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया व उनके बारे में विचार रखे , लोक कलाकार हर्षिता बिष्ट ने अपने विचारो में बताया १९३९ में ही इनकी कवितायें “कर्मभूमि” साप्ताहिक पत्र में प्रकाशित होने लगी थी, इनके कुछ फुटकर निबन्धों का संग्रह “नागिनी” इनके सहपाठी श्री शम्भूप्रसाद बहुगुणा जी ने प्रकाशित कराया। बहुगुणा जी ने ही १९४५में “हिमवन्त का एक कवि” नाम से इनकी काव्य प्रतिभा पर एक पुस्तक भी प्रकाशित की। इनके काफल पाको गीति काव्य को हिन्दी के श्रेष्ठ गीति के रूप में “प्रेमी अभिनन्दन ग्रन्थ” में स्थान दिया गया। इनकी मृत्यु के बाद बहुगुणा जी के सम्पादकत्व में “नंदिनी” गीति कविता प्रकाशित हुई, इसके बाद इनके गीत- माधवी, प्रणयिनी, पयस्विनि, जीतू, कंकड-पत्थर आदि नाम से प्रकाशित हुये।

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