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गोरखपुर जं. स्टेशन के पुनर्विकास के लिए संशोधित लागत लगभग ₹ 693 करोड़

गोरखपुर :पूर्वाेत्तर रेलवे यात्री प्रधान रेलवे है, जो अपने उपभोक्ताओं की उन्नत यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिये0 सतत प्रयत्नशील है। इसके लिये आधारभूत संरचना को सुदृढ़ एवं सुविकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर जं. स्टेशन को भी पुनर्विकसित किया जा रहा है और वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाया जायेगा। गोरखपुर जं. स्टेशन का नया डिजाइन एप्रूव एवं डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डी.पी.आर.) भी तैयार हो गया है तथा इस स्टेशन के पुनर्विकास पर संशोधित लागत लगभग ₹ 693 करोड़ आयेगी। गोरखपुर जं. स्टेशन का पुनर्विकास आगामी 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जायेगा। उस समय गोरखपुर जं. स्टेशन पर यात्री आवागमन लगभग 1,68,000 प्रति दिन होगा।

पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय गोरखपुर महान हिन्दू संन्यासी एवं महायोगी गुरू गोरक्षनाथ के मंदिर के लिये विख्यात है। 15 जनवरी, 1885 को सोनपुर से मनकापुर तक मीटर गेज रेल लाइन के निर्माण के साथ ही गोरखपुर रेलवे स्टेशन अस्तित्व में आया। वर्ष 1886 में गोरखपुर से उस्का बाजार लाइन के निर्माण के साथ ही गोरखपुर जं. स्टेशन बना। वर्ष 1981 में छपरा से मल्हौर तक का आमान परिवर्तन पूर्ण हुआ और गोरखपुर जं. बड़ी लाइन के माध्यम से देश के अन्य महानगरों से जुड़ा। वर्ष 2004 में यहाँ दोहरीकरण का कार्य सम्पन्न हुआ। समय के साथ गोरखपुर जं. स्टेशन पर गाड़ियों एवं प्लेटफॉर्मों की संख्या में वृद्धि हुई और स्टेशन के यार्ड रिमॉडलिंग का कार्य अपरिहार्य हो गया। गोरखपुर जं. स्टेशन का यार्ड रिमॉडलिंग 06 अक्टूबर, 2013 को पूर्ण हुआ। इसी के साथ गोरखपुर जं. स्टेशन का प्लेटफॉर्म विश्व का सबसे लम्बा प्लेटफॉर्म बना था। इस प्लेटफॉर्म की लम्बाई 1355.40 मीटर है तथा रैम्प के साथ इसकी लम्बाई 1366.33 मीटर है। इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉडर््स के विश्व रिकॉर्ड में स्थान मिला था। गोरखपुर जं. स्टेशन पर कुल 10 प्लेटफॉर्म हैं।
यह स्टेशन गोरखपुर जनपद की लगभग 44.5 लाख की आबादी सहित निकटवर्ती जनपदों एवं नेपाल क्षेत्र के लोगों को भी अपनी सेवायें दे रहा है तथा प्रतिदिन लगभग 93,000 यात्रियों का आवागमन होता है। इस स्टेशन से प्रतिदिन 91 जोड़ी यात्री ट्रेनें सभी प्रमुख महानगरों एवं नगरों के लिये चलाई जाती हैं।
स्टेशन पुनर्विकास के प्रस्तावित मॉडल की प्रमुख विशेषतायें
गोरखपुर जं. स्टेशन के पुनर्विकास मॉडल में स्थानीय सांस्कृतिक विरासत एवं वास्तुकला को समाहित किया गया है। अतएव गोरखपुर जं. स्टेशन के डिजाइन में स्थानीय संस्कृति की झलक दिख रही है। वर्तमान में मुख्य स्टेशन भवन का निर्माण 5,855 वर्ग मीटर एवं द्वितीय प्रवेश द्वार का निर्माण 720 वर्ग मीटर में किया गया है। प्रस्तावित स्टेशन का निर्माण 17,900 वर्ग मीटर एवं द्वितीय प्रवेश द्वार का निर्माण 7,400 वर्ग मीटर में किया जायेगा। 10,800 वर्ग मीटर में रूफ प्लाजा, जहाँ फूड आउटलेट, वेटिंग हॉल, ए.टी.एम. एवं किड्स प्ले एरिया का प्रावधान किया जायेगा। रूफ प्लाजा से प्लेटफॉर्मों तथा प्रवेश एवं निकास द्वार को 44 लिफ्ट एवं 21 एस्केलेटर के माध्यम से कनेक्ट किया जायेगा। 300 वर्ग मीटर में टिकट खिड़कियाँ बनाई जायेंगी। प्रतीक्षारत यात्रियों के लिये प्रस्तावित वेटिंग एरिया 6,300 वर्ग मीटर में बनाया जायेगा, जहाँ 3,500 व्यक्ति एक साथ बैठ कर गाड़ियों की प्रतीक्षा कर सकते हैं। दो मल्टी परपज वाणिज्यिक टॉवर बनाये जायेंगे, जिसमें मल्टी लेवल कार पार्किंग, बजट होटल, कामर्शियल शॉप इत्यादि का प्रावधान होगा। प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन एवं बस स्टेशन से स्काई वॉक-वे से लिंक किया जायेगा। कार, टू व्हीलर्स, थ्री व्हीलर्स की पार्किंग क्षमता 427 ई.सी.एस. है, जबकि प्रस्तावित पार्किंग क्षमता 838 ई.सी.एस. है। दोनों प्रवेश द्वार के सर्कुलेटिंग क्षेत्र में हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित की जायेगी।
प्रस्तावित मॉडल के अनुरूप कार्य के लिये डी.पी.आर. तैयार कर ली गई है। कार्य शुरू करने हेतु निविदा जारी किया जायेगा। निश्चित तौर पर ये स्टेशन जब पुनर्विकसित होगा तो यहां विकास और विरासत का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, साथ ही यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालुओं को एक वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन मिलेगा जो उनकी यात्रा को और भी ज्यादा सुगम बनाएगा.

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