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गर्भावस्था में महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर जांचे करानी चाहिए: डॉ. प्रीति क़ुमार

लखनऊ: गर्भावस्था में महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर जांचे करानी चाहिए। अफसोस की बात यह है कि महिलाएं जांच कराने में हिचकती हैं। डॉक्टर की सलाह पर जरूरी टीका व दवाएं खाने में भी हीलाहवाली करती है। नतीजतन प्रसव के साथ तमाम तरह की गंभीर समस्या हो सकती है। कई बार प्रसव के दौरान प्रसूता की सांसें भी थम जाती हैं। सेहत का खयाल रखकर इन मौतों को आसानी से कम किया जा सकता है। यह जानकारी यूपीकॉन की आयोजक सचिव डॉ. प्रीति कुमार ने दी।

वह बुधवार को पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थीं। डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि लखनऊ अब्सट्रेक्टस एंड गायनकोलॉजिस्ट सोसाइटी (एलओजीएस) की तरफ से यूपीकॉन का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिनों तक आयोजन होगा। इसमें देश-विदेश से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हिस्सा लेंगी। डॉ. प्रीति कुमार के मुताबिक गर्भावस्था में लापरवाही की वजह से यूपी में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों में कमी नहीं आ रही है। मौजूदा समय में यूपी में मातृ एवं शिशु मृत्युदर 167 है। केरल में यह आंकड़ा 40 है। जबकि झारखंड में 70 है।
आयोजक चेयरपर्सन डॉ. चन्द्रावती ने बताया कि प्रसव पूर्व जांच कराने में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दाईयों (मेडवाइफ)को सामान्य प्रसव के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। क्योंकि हर जगह डॉक्टरों की उपस्थिति संभव नहीं है। ऐसे में झोलाछाप से प्रसव के बजाए प्रशिक्षित दाई से प्रसव कराना ज्यादा बेहतर है। प्रदेश में मेरठ कॉलेज में दाई को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण सेंटर खोलकर मातृ मृत्यु दर के आंकड़ों में कमी लाई जा सकती है।
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. एसपी जायसवार ने बताया कि गर्भावस्था में खानपान पर ध्यान दें। क्वीनमेरी डॉ. सुजाता देव ने बताया कि 200 से अधिक पेपर और पोस्टर की प्रस्तुति होगी। 1200 से अधिक डॉक्टर कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। 600 से ज्यादा हेल्थ वर्कर को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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