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एक सीरियस नाटक का हास्यास्पद पहलू है ‘अफसोस हम ना होंगे’

लखनऊ : मंचकृति समिति द्वारा आयोजित इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड एवं विश्व अभिलेख के लिए तीस दिवसीय हास्य नाट्य महाकुम्भ की उनतीसवीं संध्या 3 मार्च 23 क़ो नाटक – अफसोस हम ना होंगे का मंचन किया गया. जिसके लेखक रणवीर सिंह हैं निर्देशन संगम बहुगुणा ने किया l यह नाट्य समारोह वर्ल्ड रिकॉर्ड बन चुका है.
नाटक की कहानी में मदन और उषा एक अच्छी सी जिंदगी बिता रहे थे. मदन उषा को अत्यधिक चाहता लेकिन उसके मन में बार-बार यह विचार आता है कि अगर मैं नहीं रहूंगा तो उषा अपनी जिंदगी कैसे गुजारे की इस कारण वह हष्ट पुष्ट होते हुए भी अपने आप को बीमार सा महसूस करता है इसी बीच जब डॉक्टर घोष मदन के यहां पर मदन का चेकअप करने आता है तब तक डॉक्टर घोष के पास एक फोन आता है और फोन करने वाला व्यक्ति डॉक्टर उसको बताता है कि उनका एक पेशेंट मरने वाला है डॉक्टर घोष उससे कहता है कि भाई अगर पेशेंट मर रहा है तो मैं क्या कर सकता हूं मैंने तो उसे अच्छी तरह से देखा था मदन यह बात सुनता रहता है और उसे लगता है कि डॉक्टर उसी के बारे में बात कर रहे हैं अब मदन समझने लगता है कि उसका समय बहुत कम है इसलिए वह अपने अंदर तरह-तरह के विचार लाता रहता है वह सोचता है कि जब वह नहीं रहेगा उषा जिसे हिसाब किताब भी करना नहीं आता क्या करेगी वह सोचता है कि शायद वह गुब्बारे बेचने लगे वह सोचता है कि उसका जो पैसा है उसको कहीं दूसरे लोग हड़पना ना ले वह सोचता है कि उषा की दूसरी शादी कर दी जाए और वह इस तरह से कल्पना में ही जीता रहता है और अपने आपको टेंशन देता रहता हैl उसका दोस्त अरविंद वहां पर आता हैl और वह सारी बात अरविंद को बताता है l वह सोचता है कि उषा की शादी उषा के दोस्त मोहन के साथसे करा दी जाए क्योंकि मेरा जीवन तो बहुत कम है 1 दिन मदन इंश्योरेंस वाले को बुला कर अपनी सारी संपत्ति उषा के नाम पर कर देता है यह बात जब वह अपने दोस्त अरविंद को बताता है अरविंद टेंशन में रोज पीकर के आने लगता है और भ्रम की यह स्थिति कई जगह हास्यास्पद हो जाती है अंत में होता है क्या जब डॉक्टर घोष वापस आते हैं तो वह बताते हैं कि मदन को तो कुछ भी नहीं है वह तो बिल्कुल तंदुरुस्त है उनका कहना था कि मुंह से निकली बात और कान से सुनी बात जरूरी नहीं है कि वह पूर्ण रूप से सच ही हो यदि आपको पूरी बात का संदर्भ पता नहीं है तो अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है. अफसोस हम ना होंगे एक सीरियस नाटक का हास्यास्पद पहलू जिसने दर्शकों आनंदित कियाl
इस नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों में मदन के रूप में अंकुर सक्सेना, उषा- भव्या द्विवेदी ,,अरविंद– अमरेश आर्यन ,,लॉन्ड्री वाला लड़का,, ग्राहक,, और उषा का प्रेमी —संगम बहुगुणा, डॉक्टर घोष- नितीश भारद्वाज ,लड़की- प्रिया राठौर ,,मोहन सुमित श्रीवास्तव और इंश्योरेंस वाला बैग _–अनुराग शुक्ला थे.

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