ई- पत्रिका को पुस्तक के रूप में लाना साहस की बात है : सुनील जोगी
हिन्दी कल्चर सेंटर टोक्यो द्वारा लोकार्पण एवं सम्मान समारोह हिंदी भवन नई दिल्ली में आयोजित

रिपोर्ट- विनीता रानी विन्नी
नई दिल्ली : दिल्ली के हिंदी भवन में जापान की संस्था हिंदी कल्चर सेंटर टोक्यो द्वारा प्रकाशित होने वाली हिंदी पत्रिका “हिंदी की गूंज“ एवं रमा शर्मा की पुस्तक “आतप जीवनम“ और “मुरझाते फूल“ का लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के सुप्रसिद्ध कवि पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने की तथा मुख्य अतिथि डॉ. आशीष कन्धवे (संपादक गंगनाचल पत्रिका) थे.

हिंदी के इस सारस्वत अनुष्ठान में विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति नियर के निदेशक इंद्रजीत शर्मा, विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध कवि प्रेम भारद्वाज “ज्ञानभिक्षु“ थे।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष नवीन चंद्र लोहनी भी इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
लोकार्पण समारोह के पश्चात इस सारस्वत सम्मान समारोह में अनेक गणमान्य लोगों को सम्मानित किया गया.

जिनमें मॉस्को से भारत आई प्रवासी साहित्यकार श्वेता सिंह उमा, ओमकार नाथ त्रिपाठी, सुरेश चन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ मुकेश सिन्हा, ओम प्रकाश प्रजापति, ज्योति जुल्का इत्यादि प्रमुख थे ।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने कहा कि जो छपी हुई पत्रिकाए हैं वे ई पत्रिकाओं में बदलती जा रही हैं. ऐसे में ई पत्रिका को पुस्तक के रूप में लाना, यह बहुत अलग है.कोई साहस नहीं कर पाता, इसके लिए उन्होंने रमा शर्मा को बधाई दी.

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आशीष कन्धवे ने कहा कि आज हिंदी की गूंज वैश्विक स्तर पर खूब सुनाई दे रही है.

परंतु चिंता का विषय यह है कि हिंदी हमारी चौखट के भीतर कितनी है, हमारी घरों में कितनी है, हमारे कार्यालय में कितनी है और हमारे हृदय में कितनी है?

निरंतर पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है, निरंतर रचनाकारों की कृतियों का प्रकाशन हो रहा है परंतु यह आवश्यक है कि इन प्रकाशित होने वाली पुस्तकों को पढ़ने वाले लोग भी समाज में उतनी ही जागरूकता और रूचि दिखाएं जितना लिखने वाले लोग दिखा रहे हैं।

उन्होंने प्रवासी साहित्यकारों को यह संदेश देने की कोशिश की सिर्फ प्रवासी होना ही आपके रचनाकार होने का मापदंड नहीं है बल्कि रचनात्मक अनुशासन और उसकी गुणवत्ता को भी ध्यान में रखना होगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध कवि प्रेम भारद्वाज “ज्ञानभिक्षु“ ने हिन्दी की गूंज पत्रिका की संरक्षक रमा शर्मा को पुस्तकों के लोकार्पण पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमें बाहर से आये साहित्यकारों का सम्मान करना चाहिए मगर रमा जी जापान से आकर यहाँ सबका सम्मान कर रही हैं, यह बहुत बड़ी बात है.

कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि विनोद पांडे ने किया. कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन व कवयित्री वंदना शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ ।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध चित्रकार हर्षवर्धन आर्य, सुबोध शर्मा, पूनम मटिया, डॉ. नीलम वर्मा,शरद आलोक, रंजन पांडे साहित्य संचय प्रकाशन के मनोज कुमार, कवयित्री एवं पत्रकार विनीता रानी ‘विन्नी’ सहित काफ़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।



