भाषा व बोली का सार्थक प्रदर्शन
कथा रंग के रंगोत्सव कार्यक्रम के जरिए भाषा और बोलियों को संरक्षित करने की दिशा में किया गया सार्थक प्रयास है। पद्मश्री : डा. विद्या बिंदु सिंह

लखनऊ । कथा रंगोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ. हमारी बोलियां विषय पर आधारित कार्यक्रम में कन्नौजी कहानी ‘राजा बुकर कना’ कहानी का वाचन डा. अपूर्वा अवस्थी और अनमाेल मिश्रा के द्वारा किया गया.अवधी कहानी’ काजी का नौकर ‘. का वाचन अमिता पांडे.. ,जय सिंह और द्वारिका.. के द्वारा किया गया.

उर्दू कहानी ‘हाजी कुल्फी वाला ‘का वाचन अनुपमा शरद द्वारा किया गया. बुंदेली कहानी ‘बिन्नू’ का वाचन कनिका अशोक और मालविका त्रिवेदी द्वारा किया गया.
इस अवसर पर पद्मश्री डा. विद्या बिंदु सिंह, डा राम बहादुर मिश्र के साथ हमारी बोलियाँ और साहित्य में उनका महत्व विषय पर परिचर्चा नूतन वशिष्ठ द्वारा की गयी।
डा. संजीव जयसवाल की कहानी मिलन का वाचन संध्या रस्तोगी, अनुपमा शरद, कनिका अशोक, के साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ.
कार्यक्रम का सुंदर संचालन संध्या रस्तोगी ने किया.अंत में धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष पुनीता अवस्थी ने दिया. इस अवसर पर शहर के विभिन्न साहित्य कार, रंगकर्मी, लोक कलाकार एवं कथा रंग के सभी सदस्य उपस्थित रहे। बोली और भाषा की मिठास के प्रदर्शन के साथ एक नयी पहल और कहानी संरक्षण के प्रयास के तहत डा. अपूर्वा अवस्थी की कन्नौजी कहानी की पुस्तक गुइयां का विमोचन हुआ ।गुइयां पुस्तक कन्नौजी बोली की लोककथाओं पर आधारित है. जिसे डा अपूर्वा अवस्थी ने कन्नौजी बोली में ही लिपिबद्ध किया है. इसमें मनोरंजक और शिक्षाप्रद लोककथाएँ है जो हमें हंसाती भी हैं, गुदगुदाती भी हैं और सिखाती भी हैं.



