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विभाजन की विभीषिका प्रदर्शनी देख महापौर संयुक्ता भाटिया की आंखे हुई नम, याद किया अतीत

                   चेरिश टाइम्स न्यूज़
            लखनऊ. विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर उत्तर रेलवे द्वारा चारबाग रेलवे स्टेशन पर लगाई गई दो दिवसीय प्रदर्शनी का महापौर संयुक्ता भाटिया ने उद्घाटन किया। इस दौरान प्रदर्शनी देख कर महापौर की आंखे नम हो गई। चूंकि महापौर संयुक्ता भाटिया ने भी विभाजन की त्रासदी को झेला है इस नाते महापौर प्रदर्शनी देख अतीत में उस भयावह दर्श को याद करते हुए भावुक हो उठी।

इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदीजी को धन्यवाद दूंगी की उन्होंने 14 अगस्त को *”विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस”* मनाने का साहस दिखाते हुए विभाजन की विभीषिका को झेलने वाले उन अनगिनत लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास किया है जो अपना घर, जमीन, जायदाद, पैसा सब कुछ छोड़कर आये है, मोदी जी ने उन माताओं और बहनों को न्याय दिलाने का प्रयास किया जो साम्प्रदायिकता के कारण अपनी आबरू की रक्षा नही कर पाई और अपनी जान दे दी। उन भाइयो- बहनों को न्याय दिलाने का प्रयास किया जो अपनी और परिवार की जान बचाते हुए स्वयं बलिदान हो गए।
वास्तव में “विभाजन की विभीषिका” भारत पाकिस्तान बटवारे का काला अध्याय है, और यह मानवता पर कलंक है। *मैंने स्वयं इस विभाजन की विभीषिका को झेला है, हमारे परिवार रात में सोए तो भारत मे थे सुबह उठे तो पैरों के नीचे से हमारी जमीन खिसक गई थी।

प्रदर्शनी के दौरान भारत विभाजन की सच्चाई सामने आई कि किस तरह साम्प्रदायिकता और इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए बेगुनाह लोगों को अपनी मिट्टी को खोना पड़ा था, उनके बसे- बसाए घर, खेती बाड़ी और फैक्ट्री, जमीन जायदाद को छोड़कर सिर्फ जान बचाने के लिए भागना पड़ा था, फिर भी ट्रेन की बोगियों में भरी लाशें, ट्रैन के ऊपर हताश भाव में बैठे अनगिनत लोग। बेबस माएँ और उसके इर्द गिर्द निर्वस्त्र भूखे मासूम। झुंड के झुंड जान बचाकर पैदल भागते शरणार्थी। दंगों में तबाह और लूटे गए इन शरणार्थियों के घर। हर तस्वीर 75 वर्ष पूर्व के विभाजन त्रासदी की जीवंत दास्तां जो भी देख रहा, दिल में दर्द ही उठ रहा, आंखें उस दुख को भोगने वालो के प्रति श्रद्धा के भाव में भर जा रही हैं। और मन मे यह सोच कि कैसे सिर्फ साम्प्रदायिकता के नाते 14 अगस्त 1947 तक एक देश के कहलाने वाले 15 अगस्त 1947 से उनके जान के प्यासे कैसे बन गए।

ज्ञात हो कि विगत वर्ष लाल किले की प्रचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने घोषणा करते हुए कहा था कि अब से देश विभाजन के दौरान साम्प्रदायिक लड़ाइयों में मारे गए लोगों को 14 अगस्त को याद करेगा।इस दिन अब विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाएगा। उनके आंसुओं और बलिदान को याद रखा जाएगा। आंसुओं से लिखी गई इस घटना को अब देश भर में याद किया जाएगा। 14 अगस्त का दिन हमेशा लोगों को *अखण्ड भारत* की याद दिलाता रहेगा।

 

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