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जगन्नाथ भगवान पर आधारित नृत्य नाटिका देखकर भावविभोर हुए भक्त
रथयात्रा महोत्सव में मोबिलोग्राफर प्रतियोगिता का आयोजन

लखनऊ. बुधवार शाम कैसरबाग स्थित कला मंडपम ऑडिटोरियम में 61वां श्री माधव मंदिर वार्षिकोत्सव जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव मनाया गया जिसका मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन था.
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के सदस्य भारत भूषण गुप्ता ओमकार जयसवाल श्याम जी साहू माया आनंद दिनेश अग्रवाल राकेश साहू दीपक मल्होत्रा अभिषेक खरे अनुराग साहू गोविंद साहू दीप प्रज्वलित कर की गयी ।
कोलकाता से आए सुप्रसिद्ध संजय शर्मा व कलाकार स्वामी डे विद्यापति सुचेता चक्रवर्ती ‘ललिता’ संजीव घोष ‘राजा’ विश्वजीत दास ‘बिस्वाबसु बाबू’ दे कृष्णा प्रियंका अंकिता द्वारा भगवान जगन्नाथ पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन किया गया. निदेशक संजय शर्मा नृत्य नाटिका की शुरुआत आदिवासी जनजाति के मुखिया ‘विश्व्वासु’ स्वामी जगन्नाथ को अपने कुल देवता ‘नील माधव’ के रूप में पूजते थे। वहीं दूसरी तरफ, मालवा के राजा इन्द्रद्युम्न भगवान विष्णु के अनन्य भक्त से किया.
राज इंद्रद्युम्न को स्वप्न में भगवान ने बताया कि वह लकड़ी के लट्ठे के रूप में समुद्रतट पर स्थित हैं। इस लकड़ी के लट्ठे से ही भगवान की मूर्ति बनाई गई।
विद्यापति ने मूर्ति पाने के लिए मुखिया ‘विश्व्वासु’ की कन्या ‘ललिता’ के साथ विवाह कर लिया। विवाह के कुछ समय बाद विद्यापति ने ललिता से नील माधव के दर्शन की इच्छा प्रकट की।
भगवान जगन्नाथ जी के जिस विग्रह का भक्त दर्शन करते हैं वह उनका काष्ठ का आवरण है जो हर 12 साल के बाद बदला जाता है। इसे बदलते समय पुजारी आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं और हाथों में वस्त्र लपेट लेते हैं। कहते हैं इस आवरण के अंदर भगवान का शरीर मौजूद है। मान्यता है कि इन्हें देखने वाले की मृत्यु हो जाएगी इसलिए आज तक मूर्ति के अंदर मौजूद तत्व को कोई देख नहीं पाया।
संस्था वरिष्ठ महामंत्री राकेश साहू ने बताया कि 30 जून 5:30 बजे विश्व शांति करुणा शांति हेतु सामूहिक हवन यज्ञ डालीगंज स्थित माधव मंदिर में किया जाएगा वही 1 जुलाई को प्रातः 10:00 बजे श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव शुभारंभ श्री माधव मंदिर से प्रारंभ होकर पंकज नगर निराला नगर बाबूगंज डालीगंज पुल अलीगंज बाजार होते हुए मंदिर पर संपन्न होगी तथा 2 जुलाई को संत सम्मेलन व भंडारा प्रसाद का वितरण किया जाएगा।




