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अकीदत से निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी और जुलूस-ए-मदहे सहाबा

लखनऊ । बारह रबीउल अव्वल के मौक़े पर लखनऊ ही नहीं, प्रदेश ही नहीं, देश ही नहीं, बल्कि कमोबेश दुनियां के “हर मुल्क” में या रसूल अल्लाह की सदा गूंजी, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की यौमे विलादत के दिन की खुशी का इज़हार करते हुए, पूरी दुनिया में इनके चाहने वालों द्वारा हज़रत जिब्राइल अलैहि सलाम की सुन्नत पर चलते हुए हर जानिब झण्डा बुलन्द किया गया।इसी के साथ सबीले लगाई गईं, नात ख्वानी की गई,मिलाद मनाया गया, और पूरी अकीदत से अपनी मुहब्बत का इज़हार किया गया।और हो भी क्यों न क्योंकि, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ललल्लाहो अलैहि वसल्लम पूरे आलम के लिए रहमतुल्ललिल आलमीन हैं। आप सल्ललल्लाहो अलैहि वसल्लम ने चलना बोलना, उठना बैठना, खाना पीना, और किस तरह से सबसे हुस्न-ए-अख्लाक से पेश आना है, ये तक सिखाया है।बारह रबीउल अव्वल के दिन सभी ने चरागा किया, रोशनी की, और जश्न-ए-ईद मिलादुन नबी मनाने के साथ साथ, लंगर-ए-आम का इंतज़ाम किया।

पूरी दुनिया के साथ साथ लखनऊ ने भी नबी करीम सल्ललल्लाहो अलैहि वसल्लम की शान में मुहब्बत अकीदत पेश की और जुलूस के दौरान दिल खोल कर सबीलों का इंतजाम किया।

खुसूसी अंदाज़ में सपा के वरिष्ठ नेता मुजाहिद सिद्दीकी ने नादान महल रोड पर भाई रियाज़ सिद्दिकी राजा सिद्दीकी तथा अपनी टीम के साथ जुलूस में शामिल लोगों को बिरयानी व ठंडा शरबत तकसीम किया। तो तुडिया गंज चौराहे पर अमन शान्ति समिति के अध्यक्ष इमरान कुरैशी ने अपनी टीम के साथ मिलकर बड़ी भव्यता से, सबील लगाकर केले, चिप्स, पेटीज, बिस्किट बांटे। तुड़िया गंज चौराहे पर ही कुरैश् समाज के अध्यक्ष सहाबुद्दीन कुरैशी तथा अम्बर फाउडेनशन के अध्यक्ष वफा अब्बास ने समस्त टीम के साथ मिलकर शीरमाल, बिस्किट, पेटीज तथा पानी तकसीम किया। आगे बढ़ते ही भाजपा नेता मुहम्मद जिशान ने सबील लगाई, उन्ही के करीब में सपा नेता “सफ़र ट्रेवल” के ओनर मुजाहिद खान ने 50 डेग बिरयानी बंटवा कर मुहब्बत की मिशाल पेश की। हैदरगंज चौराहे पर पत्रकार सलमान जे.डी ने अपनी टीम के साथ मिलकर शरबत और ठंडे पानी का इंतज़ाम किया। इसी तरह से, अमीनाबाद से लेकर ऐशबाग ईद गाह तक 300 से ज़्यादा सबीलें लगीं और दिल खोलकर नबी के नाम पर जान तक लुटाने वाले लोग, बेहतरीन अंदाज़ में उम्दा लजीज खाने की चीज़ों को लुटाते नज़र आए,और नबी करीम सल्ललल्लाहो अलैहि वसल्लम के बताए रास्ते पर चलते हुए हुस्न-ए-अख्लाक और अपनी हरकतों से अपने “मजहब” की भी नुमाइंदगी करते नज़र आए।जिसमें मुहम्मद सल्ललल्लाहो अलैहि वसल्लम ने कहा है कि किसी भी धर्म को बुरा मत कहो, अपने आस पास रहने वालों का पूरा ख्याल रखो,फिर वो किसी भी धर्म के हों।

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