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वीरेन्द्र सचदेवा के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से मिलकर दिल्ली का कृषि दर्जा बहाल करने, गांवों का हाउस टैक्स माफ करने एवं जमीनों से जुड़ी धाराओं में परिवर्तन की मांग की

नई दिल्ली : दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात कर दिल्ली में किसानों की कृषि दर्जा दिये जाने, गांवों में हाउस टैक्स समाप्त करने और जमीन पंजीकरण से जुड़ी धाराओं में परिवर्तन आदि मांगों को उपराज्यपाल के समक्ष रखा।

प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष  रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद  रमेश बिधूड़ी एवं प्रवेश साहिब सिंह, प्रदेश महामंत्री श्रीमती कमलजीत सहरावत, किसान मोर्चा अध्यक्ष  विनोद सहरावत के अतिरिक्त खाप 360 पंचायत के प्रमुख सुरेन्द्र सोलंकी एवं प्रतिनिधी भी सम्मिलित थे।

श्री वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि हमने आज उपराज्यपाल  के समक्ष दिल्ली के किसानों कहा कि 1961 से किसानों की जमीन के अधिग्रहण के बदले वैकल्पिक प्लॉट व दुकान देने की पॉलिसी है लेकिन 2016 में केजरीवाल सरकार ने किसानों के वैकल्पिक प्लॉट के आवंटन के आदेश निरस्त कर दिए, इससे दिल्ली के लगभग 16500 किसान वैकल्पिक प्लॉट मिलने से वंचित हो गये। भाजपा मांग करती है सभी 16500 किसानों को वैकल्पिक प्लॉट दिए जायें।

दिल्ली भाजपा नेताओं ने उपराज्यपाल से कहा कि दिल्ली में का किसानी दर्जा कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने छीन लिया था जिससे वे केंद्र सरकार द्वारा देश भर के किसानों को दिए जा रहे लाभ से वंचित हैं। किसान दर्जा बहाल होने से दिल्ली के किसानों को केंद्र सरकार द्वारा मिल रहे सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा और साथ ही दिल्ली के किसानों की जमीन कानूनों में संशोधन, बिजली कनेक्शन, महंगे कृषि उर्वरक, ट्रैक्टर की अनउपलब्धता जैसी समस्याएं भी हल हो जायेंगी।

दिल्ली भाजपा नेताओं ने कहा कि दिल्ली के किसान लंबे समय से धारा 33 एवं 81 हटाए जाने की मांग कर रहे हैं जिससे किसान अपनी ही जमीन बेचने के हकदार नहीं हैं। इसलिए इन धाराओं को तुरंत हटाया जाए जो किसानों के अधिकारों का हनन कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि लालडोरा को तुरंत लागू किया जाए ताकि किसानों को प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का लाभ मिल सके और साथ ही , ग्रामस्तर पर पुस्तकालय, सांस्कृतिक एवं खेलकूद स्थान, पार्क, पार्किंग, लोकल शॉपिंग सेंटर व गाँव के लिए उचित रास्ते की सुविधाएँ विकसित की जायें।

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