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यह यात्रा देश प्रेम जागरण और वीर सपूतों के नमन को समर्पित:राधा दीदी

                 चेरिश टाइम्स न्यूज़
लखनऊ. ब्रह्माकुमारी लखनऊ द्वारा ‘‘आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर’’ रैली एवं झांकी को रवाना किया गया। रैली का शुभारम्भ शहीद स्मारक पर उपमुख्यमंत्री, ब्रजेश पाठक एवं महापौर लखनऊ संयुक्ता भाटिया, ब्रह्मकुमारी राधा दीदी के द्वारा हरी झण्डी दिखाकर किया। शोभा यात्रा शहीद स्मारक से प्रारम्भ होकर परिवर्तन चौक, केडी सिंह बाबू स्टेडियम, हजरगंज बापू गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुये, श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल, राजीव चौक, लोहिया पथ होते हुये वूमेन पावर लाइन चौराहा पर समापन हुआ।

 

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी राधा दीदी ने शोभा यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि यह यात्रा देश प्रेम जागरण और वीर सपूतों के नमन को समर्पित है। देश को आजाद हुए तो बहुत साल हो गए लेकिन आज भी देश तरह-तरह की कुरीतियों, भीषण आतंक, लालच, हिंसा और मतभेदों एवं कट्टरवादिता की जंजीरों में जकड़ा हुआ है. आज का युवा तरह-तरह के व्यसनों का शिकार होकर अपने भविष्य को खराब कर रहा है. छोटे छोटे बच्चे भी इंटरनेट एडिक्शन एवं डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। लोग लालच का शिकार होकर गला काट प्रतियोगिता में लगे हुए हैं। विकारों से ग्रस्त इस समाज को देख लगता है कि अभी हमारा पूर्ण आजादी, व्यक्तिगत आजादी का सपना पूरा नहीं हुआ है। गांधी जी ने एक ऐसे रामराज्य की चर्चा की थी यहां सभी सुखी और समृद्ध हों, एक दूसरे से प्रेम करें और सबका सम्मान करें। स्वयं के अंदर विद्यमान दिव्यता को जगाकर, काम, क्रोध अहंकार आदि मनो विकारों से मुक्ति होकर ही हम वास्तविक आजादी के अमृत पान कर सकते हैं। तो आइए हम राजयोग के माध्यम से अपने आपको कुरीतियों और बुराइयों से मुक्त करके, अपने अंदर के अमृत को प्राप्त कर, आजादी के अमृत महोत्सव को वास्तविक साकार रूप दे सकें. उन्होंने नारी शक्ति का आह्वाहन करते हुए कहा कि परमात्मा ने भारत के उद्धार के लिए, मातृशक्ति को ही निमित्त बनाया है. भारत माता की जय कहा जाता है और भारत की माताओं में ही वह शक्ति है जो स्वयं को न्योछावर करते हुए, इस भारत को पुनः स्वर्णिम भारत , सतयुग की ओर ले जा सकती हैं। शोभा यात्रा का प्रारंभ, शहीद स्मारक पर एक छोटी सी मंच नाटिका से हुआ, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की पूर्ण यात्रा को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया। स्वतंत्रता सेनानियों का आजाद भारत का स्वप्न और आज हिंसा, लालच, अहंकार आदि से घिरे हुए भारत की वर्तमान दशा का आंतरिक दर्द, जैसा कि वह यदि वे आज होते तो महसूस करते, को बहुत ही अच्छे ढंग से प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा, आज हम सब बहुत सौभाग्यशाली हैं जो आजादी के 75 वें महोत्सव को देख रहे हैं। उन्होंने सभी ब्रह्माकुमारीज बहनों एवं भाइयों का अभिनंदन करते हुए उनके सतत जन-जागरण के लिए प्रयासों के लिए बधाई दी। वास्तव में बहुत से ऐसे वीर भाई एवं बहनें भी थी जिन्होंने जिन्होंने आजादी के संग्राम में अपना योगदान तो दिया लेकिन उनका नाम इतिहास में नहीं आ पाया, यह 75 वां वर्ष आज उनकी यादगार में भी मनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि आपकी जानकारी में ऐसा कोई व्यक्ति है तो उनके परिवार के लोग नगर निगम के माध्यम से हमें उसकी सूचना देंगे तो हम किसी गली या स्थान को उनके नाम पर करके, उनको सम्मानित करने की कोशिश करेंगे।
इस शोभा यात्रा में पूरे लखनऊ से ब्रम्हाकुमारी के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। शोभायात्रा में सुबह से ही लोगों में अनोखा उमंग उत्साह दिख रहा था। शोभा यात्रा का प्रारंभ शहीद स्मारक से, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक एवं महापौर, लखनऊ श्रीमती संयुक्ता भाटिया द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया।
इस यात्रा में सबसे आगे ब्रह्माकुमारी की टीचर बहनें चल रही थी उनके पीछे स्वतंत्रता सेनानी, आर्मी, नेवी एवं वायुसेना के जवान फिर डॉक्टरस एवं साइंटिस्ट का वेश धर बच्चे। इस तरह से यह संदेश दिया गया कि आज देश के पास इतनी बड़ी बड़ी मिलिट्री एवं बुद्धिजीवियों की सेना होते हुए भी, भारत विकारों की जंजीरों में जकड़ा हुआ है। जिसके पीछे काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि विकारों को एक झांकी के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसके पीछे पीछे फिर ब्रह्माकुमारीज भाई एवं बहनें चल रही थे। जो कि यह दर्शा रहे थे कि हमारी नारी शक्ति आज भी अपनी रूहानियत के द्वारा भारत को मुक्त कर एक वास्तविक रामराज्य या स्वर्णिम भारत स्थापित कर सकती है, जिसको एक स्वर्णिम भारत की झांकी से प्रस्तुत किया गया था। यह शोभायात्रा हजरतगंज होते हुए, 1090 चौराहे पर जाकर समाप्त हुई। रास्ते भर लोगों में बहुत उमंग उत्साह और जोश था जिसकी अभिव्यक्ति उन्होंने भारत माता के झंडे लहरा लहरा कर की। अंत में सभी को प्रसाद का वितरण करके, शोभा यात्रा की समाप्ति हो गई।

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