भारत अब बदल गया है। भड़काऊ मौलानाओं की ऐसी सोच को भी बदलना होगा : विनोद बंसल

मौलाना मदनी के जैसे कद्दावर मुस्लिम नेता का यह बयान कि भारत में मुसलमानों की मोब लिंचिंग हो रही है, मुस्लिम घरों, मस्जिदों, दरगाहों और इबादतगाहों को निशाना बनाकर गिराया जा रहा है। हुकूमत और प्रशासन दोनों की मिली भगत से यह हो रहा है। हमारे देश का न्याय तंत्र भी पूरी तरह से फेल हो चुका है। देश अनारकी की ओर जा रहा है। सिस्टम में मौजूद रेमेडी को हमसे छीन लिया गया है। जो न्याय तंत्र है वह हमें जरूरी सुरक्षा और सहायता नहीं कर रहा है। हम संघर्ष कर रहे हैं किंतु वर्तमान सिस्टम में हमारे पास कोई निदान नहीं बचा है, इसलिए हम मुस्लिम देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, यहां तक के संयुक्त राष्ट्र संघ में भी शिकायत करेंगे।
ऊपर से मौलाना यह भी धमकी देते हैं कि हम जनसंख्या में देश के दूसरे सबसे बड़े समुदाय हैं और सबसे अधिक संख्या वाले अल्पसंख्यक समुदाय भी हैं।
मौलाना की ये बातें सिर्फ मीडिया के सामने दिया हुआ एक वक्तव्य नहीं अपितु देश की राजधानी में बैठकर भारत की संप्रभुता पर विदेशी शक्तियों के साथ मिलकर आक्रमण करने की सीधी धमकी है।
जिस व्यक्ति या उनके कट्टरपंथी धड़े का भारत के संविधान, सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका तक से भरोसा उठ गया हो तो वह भला यहां रह क्यों रहा है? वैसे भी 1947 में भारत का बहुत बड़ा भू भाग ऐसे ही भारत विरोधी मौलानाओं की जिद से अलग हो चुका है। ये भारत माता की जय और वन्देमातरम् पर भड़काते हैं और आतंकियों की इसी न्यायालय में खुल्लमखुल्ला पैरवी करते हैं।
क्या मौलाना भूल गए कि सर्वाधिक मोब लिंचिंग किसकी और किसने की! यदि सूची चाहिए तो भेजदेंगे। क्या उनको यह नहीं पता कि जितने भी अवैध निर्माण दहाए गए वे सब भारत के कानून को धता बता कर बनाए गए कलंक थे। उन्हें मस्जिद मदरसे और इबादत घर कहना पाप और पापी दोनों को बचाने के समान है।
उन्हें यदि यह भारत और उसका तंत्र पसंद नहीं है तो वे अपने सभी जिहादी मित्रों के साथ किसी ऐसे देश में जाने को स्वतंत्र हैं जहां उनके सभी गैर कानूनी कार्यों, अनैतिक गतिविधियों और आतंकी मानसिकता को आसानी से पल्लवित और पोषित किया जा सके।
किंतु..
भारत अब बदल गया है। भड़काऊ मौलानाओं की ऐसी सोच को भी बदलना होगा। साथ ही मुस्लिम समुदाय को भी यह तय करना चाहिए कि क्या ऐसे भड़काऊ और देश विरोधी मौलाना आपके किसी बड़े विनाश की कोई पटकथा तो नहीं लिख रहे। इनसे जितनी जल्दी हो सके किनारा करना ही उचित है
विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता विहिप



