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बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ द्वारा ‘व्याख्यान- सह प्रदर्शन ’ आयोजित 

विषयः-‘दृश्य कला के सौन्दर्य तत्व: नृत्य के संदर्भ में '

लखनऊ : 07 मई, 2026 को बिरजू महाराज कथक संस्थान संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के परिसर में “व्याख्यान- सह प्रदर्शन ” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डाॅ० सुनील कुमार विश्वकर्मा , अध्यक्ष राज्य ललित कला अकादमी, उ०प्र०, लखनऊ रहे, जिन्होंने “दृश्य कला के सौन्दर्य तत्व: नृत्य के संदर्भ मेें” विषय के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस व्याख्यान के अंतर्गत उत्कृष्ट वक्ता ने अपनी कला एवं विचारों के माध्यम से श्रोताओं के समक्ष सौंदर्य सिद्धान्तों पर चर्चा की। उन्होंने बताया संचारी भाव, विभाव, अनुभाव से रस की उत्पत्ति होती है। रस अंततः आनन्द देने वाला है, कला का कार्य आनन्द कराना है। नर्तक अकथ्य को कथ्य करता है। मैं (अहं) भाव समाप्त होने पर ही कलाकार कला की सम्पूर्णता को प्राप्त कर सकता है।

इस अवसर पर भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रो० माण्डवी सिंह जी, संस्थान की अध्यक्ष, डाॅ. कुमकुम धर जी एवं उपाध्यक्ष डाॅ. मिथिलेश तिवारी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की प्रशिक्षिका डाॅ. उपासना दीक्षित द्वारा किया गया।
संस्थान के विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में सहभागिता की। यह व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।

 

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