हिन्दुस्तानी तहज़ीब का आईना, प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदी पत्रकार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर याद दिलाया कि पत्रकारिता सिर्फ खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का दायित्व भी है। इस कार्यक्रम में हिन्दुस्तानी तहज़ीब, सांप्रदायिक एकता और लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका पर गहन चर्चा हुई, जो वर्तमान समय में बेहद प्रासंगिक थी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डी.पी. शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पंडित धीरेन्द्र मिश्रा, डॉ. मोहम्मद कामरान, सरदार परमजीत सिंह और गुरमीत कौर जैसे विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने मंच साझा किया। यह दृश्य स्वयं में हिन्दुस्तानी तहज़ीब का सुंदर उदाहरण था, जहाँ अलग-अलग धर्मों और सम्प्रदायों के लोग एक मंच से सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दे रहे थे।
ऑल इंडिया न्यूजपेपर एसोसिएशन (आईना) के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. मोहम्मद कामरान ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया केवल लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं है, बल्कि वह आईना है जो समाज को सच्चाई का सामना कराता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा स्वस्थ लोकतंत्र की असली पहचान है। भारतीय संविधान द्वारा प्रदान की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को हमारा गर्व होना चाहिए।
डॉ. कामरान ने आगे कहा, जब कलम निर्भीक होती है, तब राष्ट्र सशक्त बनता है। जब आवाज आजाद होती है, तब लोकतंत्र जीवंत रहता है। उनका यह कथन आज के उन समय में विशेष महत्व रखता है जब पत्रकारों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
डी.पी. शुक्ला ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आयोजन पत्रकारिता के मूल्यों, समाज में पत्रकारों की भूमिका और श्रमिक दिवस के महत्व को याद दिलाने के लिए किया गया था। उन्होंने उन कलमकारों को सम्मानित करने का संकल्प लिया जिन्होंने जमीन स्तर पर काम करते हुए उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर, बहराइच जैसे जिलों में तथ्यपरक और खोजपरक पत्रकारिता के माध्यम से भ्रष्टाचार उजागर किया और प्रदेश की पत्रकारिता को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी।
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों को पुनः मजबूत करने का प्रयास था। संचालक **संतोष तिवारी** और प्रदेश अध्यक्ष **संजीव त्रिपाठी** की टीम द्वारा बेहतरीन ढंग से संचालित यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए यादगार रहा।
प्रेस स्वतंत्रता दिवस हमें याद दिलाता है कि सच्ची पत्रकारिता समाज का दर्पण होती है। जब यह दर्पण साफ और निर्भीक होगा, तभी समाज और राष्ट्र सही दिशा में आगे बढ़ सकता है। हिन्दुस्तानी तहज़ीब को बनाए रखने और लोकतंत्र को मजबूत करने में पत्रकारों की भूमिका निर्णायक है। आशा है कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर होते रहेंगे और कलम की ताकत को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।


