ट्रेड डील के विरोध में गूंजा किसान अधिकार सम्मेलन, लोकदल ने दी आंदोलन की चेतावनी

मथुरा। लोकदल व विभिन्न किसान संगठनों के तत्वावधान में 18 मार्च 2026 को होटल मुकुंद पलेस, सौंख अड्डा मथुरा में आयोजित किसान अधिकार सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में किसानों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही, जहां देश के किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व एमएलसी एवं लोकदल अध्यक्ष चौ. सुनील सिंह ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील पर तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह डील भारतीय कृषि व्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में सौंपने का प्रयास है और इससे देश का अन्नदाता गंभीर संकट में पड़ जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसानों से संवाद किए किए जा रहे ऐसे समझौते न केवल किसानों के हितों के खिलाफ हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कमजोर करने वाले हैं। इस डील का सीधा असर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), स्थानीय मंडियों और छोटे किसानों के अस्तित्व पर पड़ेगा।
चौ. सुनील सिंह ने कहा कि अन्नदाता के सम्मान और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और किसान संगठनों की राय को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते इस ट्रेड डील को वापस नहीं लिया, तो किसान संगठन व्यापक और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। साथ ही उन्होंने एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि लागत में कमी, फसलों का उचित मूल्य,विद्युत दर तथा युवाओं को कृषि आधारित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग दोहराई।
सम्मेलन में ऋषिपाल अम्बावता राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन सरदार वीएम सिंह ,प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा प्रदीप हुड्डा,लोकदल राष्ट्रीय प्रवक्ता हरीश हूण, चौधरी देवेंद्र सिंह बाना राष्ट्रीय अध्यक्ष बीकेयू लोकहित , चौधरी बलबीर सिंह ,लोकदल के पश्चिम प्रभारी युवा नेता संदीप तोमर, सहित कई प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष का आह्वान किया, और एक स्वर में कहा कि अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि आर-पार की लड़ाई होगी।
यदि सरकार ने किसानों की अनदेखी जारी रखी, तो सड़कों से लेकर संसद तक जोरदार आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
किसान अब चुप बैठने वाला नहीं है, अपने हक के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा और पीछे नहीं हटेगा।



