नवाबी शासन के दौरान लखनऊ

के. सरन
नवाबो ने अवध की राजधानी लखनऊ को खूब संवारा।इसे क्रेमलिनॅऑफ इण्डिया जैसा उपनाम दिया गया।योरोप की वास्तुकला का उपयोग आवासीय भवनो के लिऐ किया गया।धार्मिक भवनो के निर्माण मे मुस्लिम कला का अनुसरण हुआ जिसकी झलक हम शाहनजफ और रूमी दरवाजे मे देखते हैं ।इमामबाडे और बारादरियों मे ईरान की वास्तुकला का प्रभाव है।
लखनऊ के उदार शिया नवाबों में सांप्रदायिक कट्टरता नहीं थीजिसके कारण हिन्दुओं के रीति रिवाजो को स्वीकार करने और संरक्षण देने में नवाबो को कोई दिक्कत नही दिखाई पडी।उसी समय से संस्कृति मे भिन्नता होते हुए भी दोनो एक दूसरे की संस्कृति और त्योहारों को मान्यता देकर मिलजुलकर आनन्द मनाते थे।अवध का यही तहजीब तरीका कि मिलजुल कर रहने मे आनन्द है और लडने झगडने से वैमनस्यता बढती है, लखनऊ की गंगो- जमनी तहजीब थी जो अवध की पहचान बनी थी l
अवध में शेख शासन समाप्त करने के लिए सआदत खां बुरहानुल्मुल्क को 1724 मे दिल्ली दरबार ने अवध का सूबेदार नियुक्त किया था जो शेख साम्राज्य समाप्त कर राजधानी फैजाबाद ले गया था और उसके न रहने पर उनके भांजे – दामाद मुहम्मद मक मिर्ज़ा अब्दुल मंसूर अली खां सफदरजंग अवध के दूसरे नवाब बने और 1739 से 1754 तक शासन किया। उसी दौरान, उनके नाम से मुहल्ला सफदर बाग़ बसा था जो कालांतर में सबदल बाग फिर सुन्दर बाग के नाम से जाना जाता है। जो हिवेट रोड के दक्षिण और लालकुआँ से हसैन गंज जाने वाली सडक के बायी ओर बसा है।
लखनऊ को बागो का शहर कहा जाता था।
अब वो पुराने बाग तो रहे नहीं पर उनके स्थान पर बसाई गई बस्तियो को इन बागो के नाम से जाना जाने लगा।सभी बाग बगीचे नवाबी काल 1724 से 1856 के बीच लगाये गए थे वही धीरे -धीरे मुहल्लों मे तब्दील होते चले गए ।महताबबाग,सरदारबाग,मुहसिन बाग(मौसम बाग),सोबतिया बाग,ऐशबाग ,चारबाग, नजर बाग,आलमबाग, फूल बाग, कैसर बाग,हुस्नबाग,बुलन्द बाग, हुजूरबाग,खुर्शेद बाग,अमरूदही बाग,रिसालदार बाग, बन्दरिया बाग,बाबा हजारा बाग, बाग धनिया महरी,वजीर बाग,बादशाह बाग,सिकन्दर बाग ,बाग द्वारकादास,बाग गोपाल दास,बाग शेर जंग,बाग शाहजी,इसी तरह छोटी बगिया जहाँ कायम हुई। ये बस्तियां उन्ही बागों के नाम से जानी जाती हैं ।
गुल की बगिया, दर्जी की बगिया, मिसरी की बगिया, पुत्तू लाल की बगिया, बिहारी की बगिया, आदि। कुछ मशहूर कुएँ तालाबो के नाम से भी उनके आस -पास बसी बस्तियां जानी गई ।जैसे:-कुओं के नाम पर,छाछीकुआं ,लालकुआँ, दहला कुआं,चरकवाला कुआं (हुसैनाबाद),भोलानाथ कुआं जो काश्मीरी ब्राहमण राजा बख्शी के खानदान का है,तथा कंकर कुआँ आदि।
आबादी बढने पर जिन तालाबों पर बस्तियां बनी उनके नाम हैं- टिकैत राय का तालाब, गुइन तालाब ,टडियन तालाब,तालाब गगनी शुकुल ,फतेहअली का तालाब,पांडे का तालाब आदि।झील के नाम पर मोती झील,चिरैया झील,कठौता झील,अहल झील,आदि।
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